राजस्थान CET › समसामयिकी

नागरिक कर्तव्य व राजस्थान परीक्षा अधिनियम

मूल कर्तव्य (अनुच्छेद 51क) · सामाजिक उत्तरदायित्व · मतदाता जागरूकता · राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम 2022 — संपूर्ण अध्याय
भारतीय संविधान व लोकतंत्र — नागरिक के मूल कर्तव्य व मताधिकार का स्रोत (संसद भवन)
भारतीय संविधान व लोकतंत्र — नागरिक के मूल कर्तव्य व मताधिकार का स्रोत (संसद भवन)
Nikhilb239 · CC BY-SA 4.0 · Wikimedia Commons

शुरू करने से पहले

यह अध्याय दो जुड़े हुए विषयों को एक साथ पढ़ाता है — (1) एक नागरिक के कर्तव्य, जिसमें संविधान के अनुच्छेद 51क में दिए 11 मूल कर्तव्य तथा उससे जुड़ा सामाजिक उत्तरदायित्व व मतदाता जागरूकता आती है, और (2) राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2022 — जो पेपर लीक व नकल को रोकने के लिए बना कठोर कानून है। CET (समसामयिकी) में यहाँ से सीधे तथ्यात्मक प्रश्न आते हैं — जैसे मूल कर्तव्य किस अनुच्छेद/किस समिति की सिफारिश पर जोड़े गए, कितने हैं; मतदान की न्यूनतम आयु; और परीक्षा अधिनियम में किस अपराध पर कितनी सज़ा, जुर्माना व संपत्ति कुर्की का प्रावधान। यह विषय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य ने 2023 में इस कानून को और सख़्त बनाते हुए आजीवन कारावास तक का दंड जोड़ा, और यह सीधे परीक्षार्थी (आप) से जुड़ा है। नीचे हर उप-विषय को शून्य से समझाया गया है — पहले 'नागरिक कर्तव्य' का संवैधानिक आधार, फिर मतदाता जागरूकता, फिर पूरा परीक्षा अधिनियम बिंदुवार। हर पाठ के बाद 'याद रखें' तथ्य व परीक्षा-ट्रिक दी गई है; अंत में तालिकाओं व शब्दावली से दोहराएँ।

1. नागरिक के कर्तव्य — आधार समझें (अधिकार बनाम कर्तव्य)

लोकतंत्र में नागरिक को संविधान केवल अधिकार (Rights) ही नहीं देता, बल्कि कुछ कर्तव्य (Duties) भी सौंपता है। अधिकार और कर्तव्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं — जहाँ एक का अधिकार है, वहीं दूसरे का कर्तव्य भी जुड़ा है। नागरिक के कर्तव्य दो प्रकार के होते हैं:

ध्यान दें — मूल कर्तव्य 'नैतिक' (Moral) प्रकृति के हैं अर्थात् इन्हें न मानने पर सीधे न्यायालय में दंड नहीं मिलता (Non-justiciable), जबकि सामाजिक उत्तरदायित्व व्यक्ति की अंतरात्मा व नागरिक-बोध पर आधारित होते हैं। एक जागरूक नागरिक का सबसे बड़ा सामाजिक उत्तरदायित्व है — मतदान में भाग लेना।

याद रखें
  • नागरिक के कर्तव्य = मूल कर्तव्य (संविधान, अनुच्छेद 51क) + सामाजिक/नैतिक उत्तरदायित्व।
  • मूल कर्तव्य 'न्यायालय द्वारा बाध्यकारी नहीं' (Non-justiciable) हैं — नैतिक प्रकृति के।
  • सबसे बड़ा सामाजिक उत्तरदायित्व = मतदान करना (लोकतंत्र की नींव)।

2. मूल कर्तव्य (अनुच्छेद 51क) — कितने, कब, किसकी सिफारिश पर

मूल कर्तव्य भारतीय संविधान के मूल (1950) में नहीं थे — ये बाद में जोड़े गए। 1976 में सरदार स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर 42वें संविधान संशोधन (1976) द्वारा भाग-4क व अनुच्छेद 51क जोड़कर मूल कर्तव्य संविधान में शामिल किए गए। ये पूर्व सोवियत संघ (रूस) के संविधान से प्रेरित हैं।

संक्षेप में याद रखें — मूल कर्तव्य: भाग-4क, अनुच्छेद 51क, 42वें संशोधन (1976) से, स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर, रूस से प्रेरित; प्रारंभ में 10, अब 11 (11वाँ — 86वें संशोधन 2002 से शिक्षा से जुड़ा)।

डॉ. भीमराव अंबेडकर — संविधान के प्रमुख शिल्पी; मूल कर्तव्य (अनु. 51क) बाद में 1976 के 42वें संशोधन से जुड़े
डॉ. भीमराव अंबेडकर — संविधान के प्रमुख शिल्पी; मूल कर्तव्य (अनु. 51क) बाद में 1976 के 42वें संशोधन से जुड़े
Unknown authorUnknown author · Public domain · Wikimedia Commons
याद रखें
  • मूल कर्तव्य = भाग-4क, अनुच्छेद 51क; 42वें संविधान संशोधन (1976) से जोड़े गए।
  • सिफारिश — सरदार स्वर्ण सिंह समिति (1976); प्रेरणा — पूर्व सोवियत संघ (रूस)।
  • प्रारंभ में 10, अब कुल 11 कर्तव्य; 11वाँ — 86वाँ संशोधन (2002), शिक्षा से जुड़ा।

3. ग्यारह मूल कर्तव्य — एक-एक करके (अनुच्छेद 51क)

अनुच्छेद 51क प्रत्येक भारतीय नागरिक के 11 मूल कर्तव्य बताता है। परीक्षा में 'कौन-सा मूल कर्तव्य है / नहीं है' तथा '11वाँ कौन-सा है' पूछा जाता है। संक्षेप में सभी 11:

परीक्षा-दृष्टि से दो तथ्य पक्के करें — पर्यावरण-संरक्षण [(छ)] भी मूल कर्तव्य है, और 11वाँ कर्तव्य [(ट)] 6-14 वर्ष के बच्चों की शिक्षा से जुड़ा है (86वाँ संशोधन, 2002)। साथ ही ध्यान दें — 'कर देना/मतदान करना' मूल कर्तव्यों की सूची में नहीं है (ये सामाजिक/कानूनी कर्तव्य हैं)।

याद रखें
  • अनुच्छेद 51क में कुल 11 मूल कर्तव्य; पर्यावरण-संरक्षण [(छ)] भी इनमें शामिल।
  • 11वाँ कर्तव्य [(ट)] — 6 से 14 वर्ष के बच्चे को शिक्षा का अवसर (86वाँ संशोधन, 2002)।
  • मतदान व कर-भुगतान मूल कर्तव्यों में नहीं — ये सामाजिक/कानूनी कर्तव्य हैं।

4. सामाजिक उत्तरदायित्व — एक अच्छे नागरिक की भूमिका

मूल कर्तव्य कानून-केंद्रित हैं, पर सामाजिक उत्तरदायित्व रोज़मर्रा के व्यवहार से जुड़े हैं। ये न मानने पर सीधा दंड भले न हो, पर समाज व राष्ट्र इन्हीं पर टिका है। प्रमुख सामाजिक उत्तरदायित्व:

इस अध्याय में सामाजिक उत्तरदायित्व का सबसे प्रासंगिक रूप है — 'मतदाता जागरूकता' (अगले पाठ में) और 'परीक्षा में ईमानदारी' (परीक्षा अधिनियम वाला भाग)। एक नागरिक का सत्यनिष्ठ आचरण ही ईमानदार लोकतंत्र व पारदर्शी भर्ती की नींव है।

याद रखें
  • सामाजिक उत्तरदायित्व = स्वच्छता, कर-भुगतान, यातायात-अनुशासन, सद्भाव, मतदान, ईमानदारी।
  • ये गैर-कानूनी पर नैतिक रूप से बाध्यकारी; लोकतंत्र की असली नींव।
  • मतदाता जागरूकता व परीक्षा में ईमानदारी — इस अध्याय के दो केंद्रीय सामाजिक उत्तरदायित्व।

5. मतदाता जागरूकता — मताधिकार, आयु व SVEEP

लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है — मतदान (Voting)। भारत में प्रत्येक वयस्क नागरिक को बिना जाति-धर्म-लिंग-संपत्ति भेद के वोट देने का अधिकार है, जिसे 'सार्वभौम वयस्क मताधिकार' (Universal Adult Franchise) कहते हैं। मतदाता को जागरूक बनाना चुनाव आयोग का प्रमुख कार्य है:

मतदाता जागरूकता का मूल संदेश — 'पहले मतदान, फिर जलपान'। हर वोट देश की दिशा तय करता है; मतदान न करना भी लोकतंत्र की हानि है। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की स्थापना 25 जनवरी 1950 को हुई, और सुकुमार सेन भारत के प्रथम मुख्य निर्वाचन आयुक्त थे।

मतदाता जागरूकता — हर 18+ नागरिक का मताधिकार
मतदाता जागरूकता — हर 18+ नागरिक का मताधिकार
Photo Division, Ministry of Information & Broadcasting, Government of India · Public domain · Wikimedia Commons
याद रखें
  • मतदान की न्यूनतम आयु 18 वर्ष — 61वें संविधान संशोधन (1988) से (पहले 21 थी); अनुच्छेद 326।
  • SVEEP = चुनाव आयोग का मतदाता-जागरूकता अभियान; राष्ट्रीय मतदाता दिवस = 25 जनवरी।
  • ECI स्थापना — 25 जनवरी 1950; प्रथम मुख्य निर्वाचन आयुक्त — सुकुमार सेन; NOTA 2013 से।

6. राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम 2022 — पृष्ठभूमि व उद्देश्य

बार-बार होते पेपर लीक व नकल-गिरोहों ने लाखों मेहनती परीक्षार्थियों का भविष्य ख़तरे में डाला। इसी को रोकने के लिए राजस्थान सरकार ने 'राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2022' (Rajasthan Public Examination — Prevention of Unfair Means — Act, 2022) बनाया। यह कानून मार्च 2022 में राजस्थान विधानसभा में पारित हुआ, अप्रैल 2022 में राज्यपाल की स्वीकृति मिली और 2022 में ही लागू हुआ।

सरल शब्दों में — इस कानून का लक्ष्य है कि कोई भी व्यक्ति, गिरोह या संस्था परीक्षा में बेईमानी करके योग्य अभ्यर्थियों का हक न छीन सके। चूँकि CET भी एक सार्वजनिक परीक्षा है, यह कानून आप पर भी लागू होता है — इसलिए परीक्षा में पूर्ण ईमानदारी बरतें।

राजस्थान विधानसभा भवन — जहाँ परीक्षा अधिनियम 2022 पारित हुआ
राजस्थान विधानसभा भवन — जहाँ परीक्षा अधिनियम 2022 पारित हुआ
Subodhgadgil · CC BY-SA 4.0 · Wikimedia Commons
याद रखें
  • नाम — राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2022; पारित — मार्च 2022 (राज्यपाल स्वीकृति अप्रैल 2022)।
  • उद्देश्य — पेपर लीक/नकल रोककर पारदर्शी, निष्पक्ष भर्ती; RPSC/RSMSSB/CET आदि पर लागू।
  • अपराध — संज्ञेय, गैर-जमानती व गैर-समझौता-योग्य; 2023 संशोधन से आजीवन कारावास तक संभव।

7. अपराध व दंड — कारावास, जुर्माना व संपत्ति कुर्की

अधिनियम परीक्षा से जुड़े विभिन्न अपराधों के लिए अलग-अलग कड़ी सज़ा तय करता है। मुख्य प्रावधान (मूल 2022 अधिनियम व 2023 संशोधन सहित):

ध्यान दें — पेपर लीक/संगठित अपराध की सज़ा (आजीवन कारावास, 10 करोड़ जुर्माना) सबसे कठोर है, जबकि सामान्य नकल पर भी कम-से-कम 3 वर्ष की जेल हो सकती है। दंड के संख्यात्मक तथ्य (वर्ष व रुपये) ही CET में सबसे अधिक पूछे जाते हैं।

याद रखें
  • परीक्षार्थी द्वारा नकल — 3 वर्ष तक कारावास व न्यूनतम 1 लाख जुर्माना; 2 वर्ष तक डिबार।
  • पेपर लीक/साज़िश — 5 से 10 वर्ष कारावास, न्यूनतम 10 लाख जुर्माना (मूल अधिनियम)।
  • संगठित गिरोह (2023 संशोधन) — आजीवन कारावास तक व 10 करोड़ तक जुर्माना; न भरने पर संपत्ति कुर्की।

8. संपत्ति कुर्की व पेपर लीक के विशेष प्रावधान

इस कानून की दो सबसे चर्चित कड़ियाँ हैं — संपत्ति कुर्की (Property Attachment) और पेपर लीक रोकने के विशेष प्रावधान। ये ही इसे अन्य राज्यों की तुलना में सख़्त बनाते हैं:

केंद्र सरकार ने भी 2024 में राष्ट्रीय स्तर पर 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024' बनाया (UPSC, SSC, NEET, रेलवे आदि के लिए) — पर राजस्थान CET के लिए मूल आधार राज्य का 2022 का अधिनियम (व 2023 संशोधन) ही है। राजस्थान, इस दिशा में कठोर कानून बनाने वाले अग्रणी राज्यों में रहा है।

याद रखें
  • संपत्ति कुर्की — अवैध कमाई व अपराध में प्रयुक्त संपत्ति जब्त; जुर्माना न भरने पर बेचकर वसूली।
  • पेपर लीक, डमी अभ्यर्थी, हल-पत्र बेचना — सभी गंभीर अपराध; परीक्षा रद्द कर पुनर्परीक्षा का प्रावधान।
  • केंद्र का अलग कानून — लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024; पर CET हेतु राज्य 2022 अधिनियम लागू।

नागरिक कर्तव्य व परीक्षा अधिनियम — झलकियाँ

परीक्षा-उपयोगी तालिकाएँ

मूल कर्तव्य — एक नज़र में

बिंदुतथ्य
संविधान में स्थानभाग-4क, अनुच्छेद 51क
किस संशोधन से जुड़े42वाँ संविधान संशोधन, 1976
किसकी सिफारिश परसरदार स्वर्ण सिंह समिति (1976)
प्रेरणा-स्रोतपूर्व सोवियत संघ (रूस) का संविधान
प्रारंभिक संख्या10 (1976 में)
वर्तमान संख्या11 (11वाँ — 86वाँ संशोधन, 2002)
11वाँ कर्तव्य6-14 वर्ष के बच्चे को शिक्षा का अवसर

नागरिक के कर्तव्य — तीन प्रकार

प्रकारउदाहरण व प्रकृति
मूल/मौलिक कर्तव्यअनुच्छेद 51क; नैतिक/गैर-न्यायसंगत (Non-justiciable)
सामाजिक उत्तरदायित्वमतदान, स्वच्छता, सद्भाव; नैतिक रूप से बाध्यकारी
कानूनी कर्तव्यकर देना, गवाही देना; उल्लंघन पर दंड

मतदाता जागरूकता — मुख्य तथ्य

बिंदुतथ्य
मतदान की न्यूनतम आयु18 वर्ष (पहले 21)
किस संशोधन से 18 हुई61वाँ संविधान संशोधन, 1988 (अनुच्छेद 326)
जागरूकता अभियानSVEEP
राष्ट्रीय मतदाता दिवस25 जनवरी (2011 से)
ECI स्थापना25 जनवरी 1950
प्रथम मुख्य निर्वाचन आयुक्तसुकुमार सेन
NOTA विकल्प2013 से

परीक्षा अधिनियम 2022 — परिचय

बिंदुतथ्य
पूरा नामराजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2022
पारितमार्च 2022 (राजस्थान विधानसभा); स्वीकृति अप्रैल 2022
उद्देश्यपेपर लीक/नकल रोककर पारदर्शी भर्ती
किन पर लागूRPSC, RSMSSB, CET आदि सार्वजनिक परीक्षाएँ
अपराध की प्रकृतिसंज्ञेय, गैर-जमानती, गैर-समझौता-योग्य
कठोरता संशोधन2023 — आजीवन कारावास व 10 करोड़ तक जुर्माना

अपराध → दंड (कारावास व जुर्माना)

अपराधदंड
परीक्षार्थी द्वारा नकल/अनुचित साधन3 वर्ष तक कारावास + न्यूनतम 1 लाख जुर्माना; दोषसिद्धि पर 2 वर्ष तक डिबार
प्रश्नपत्र लीक / साज़िश (मूल)5 से 10 वर्ष कारावास + न्यूनतम 10 लाख जुर्माना
संगठित गिरोह (2023 संशोधन)10 वर्ष से आजीवन कारावास + 10 करोड़ तक जुर्माना
जुर्माना न भरने परसंपत्ति कुर्की व वसूली; अतिरिक्त कारावास

अधिनियम — विशेष प्रावधान

प्रावधानविवरण
संपत्ति कुर्कीअवैध कमाई व अपराध में प्रयुक्त संपत्ति जब्त/बेचकर वसूली
परीक्षा रद्द/पुनर्परीक्षालीक पर परीक्षा रद्द; खर्च दोषी से वसूली
डमी अभ्यर्थी/हल-पत्र बेचनागंभीर अपराध — कठोर दंड
संस्था/सेवा-प्रदाता की मिलीभगतदंड व ब्लैकलिस्टिंग (परीक्षा से प्रतिबंध)
केंद्र का समकक्ष कानूनलोक परीक्षा अधिनियम, 2024 (NEET/UPSC/SSC हेतु)

शब्दावली — अंग्रेज़ी पद का अर्थ

मूल/मौलिक कर्तव्य
संविधान के भाग-4क, अनुच्छेद 51क में दिए नागरिक के 11 कर्तव्य।
अनुच्छेद 51क
संविधान का वह अनुच्छेद जिसमें मूल कर्तव्य लिखित हैं (42वें संशोधन से जोड़ा)।
स्वर्ण सिंह समिति
1976 की समिति जिसकी सिफारिश पर मूल कर्तव्य संविधान में जोड़े गए।
गैर-न्यायसंगत (Non-justiciable)
जिसके उल्लंघन पर सीधे न्यायालय में दंड नहीं मिलता (मूल कर्तव्य ऐसे ही हैं)।
सामाजिक उत्तरदायित्व
अच्छे नागरिक से अपेक्षित नैतिक कर्तव्य — मतदान, स्वच्छता, सद्भाव।
सार्वभौम वयस्क मताधिकार
18+ हर नागरिक को बिना भेदभाव एक वोट का समान अधिकार (अनुच्छेद 326)।
SVEEP
चुनाव आयोग का मतदाता शिक्षा व सहभागिता अभियान।
NOTA
'इनमें से कोई नहीं' — मतपत्र पर सभी प्रत्याशी अस्वीकार करने का विकल्प (2013 से)।
अनुचित साधन
परीक्षा में नकल, पेपर लीक, डमी अभ्यर्थी आदि बेईमानी के तरीके।
संज्ञेय अपराध (Cognizable)
जिसमें पुलिस बिना वारंट गिरफ्तार कर सकती है।
गैर-जमानती (Non-bailable)
जिसमें ज़मानत आसानी से नहीं मिलती; न्यायालय के विवेक पर।
संपत्ति कुर्की (Attachment)
दोषी की संपत्ति जब्त कर जुर्माना/हर्जा वसूलने की कार्रवाई।
वास्तविक RPSC CET प्रश्न · सामग्री हस्तलिखित व सत्यापित
इस टॉपिक के असली PYQ — RealNorth पर फ्री में अभ्यास करें →