पदार्थ की अवस्थाएँ · भौतिक/रासायनिक परिवर्तन · अभिक्रिया के प्रकार · रेडॉक्स · संक्षारण · अम्ल-क्षार-लवण व pH — संपूर्ण अध्याय
पदार्थ में परिवर्तन — बाएँ: पिघलती बर्फ (भौतिक परिवर्तन — केवल अवस्था बदली) · बीच: जलता मैग्नीशियम फीता (रासायनिक अभिक्रिया — नया पदार्थ MgO बनता है) · दाएँ: लोहे की ज़ंग लगी ज़ंजीर (संक्षारण — धीमी रासायनिक अभिक्रिया)Kathy Jantz (CC BY 4.0) · Capt. John Yossarian · Biswarup Ganguly (CC BY-SA 3.0) · Wikimedia Commons
शुरू करने से पहले
हमारे चारों ओर जो कुछ भी स्थान घेरता है और जिसका द्रव्यमान होता है, वह 'पदार्थ' (Matter) है — जैसे पानी, हवा, लोहा, नमक। यह अध्याय पदार्थ की तीन अवस्थाओं (ठोस-द्रव-गैस) से शुरू होकर बताता है कि पदार्थ में परिवर्तन कैसे होते हैं — कुछ परिवर्तन केवल रूप बदलते हैं (भौतिक) और कुछ में बिल्कुल नया पदार्थ बनता है (रासायनिक)। फिर हम रासायनिक अभिक्रिया के चार प्रकार (संयोजन, वियोजन, विस्थापन, द्विविस्थापन), ऑक्सीकरण-अपचयन (रेडॉक्स), लोहे में जंग जैसी संक्षारण-क्रिया, घी-तेल के खराब होने की विकृतगंधिता, तथा अम्ल-क्षार-लवण व pH मान को सरल भाषा में समझेंगे। CET में 'दैनिक विज्ञान' से प्रायः इसी अध्याय से प्रश्न आते हैं — जैसे 'दूध का दही जमना कौन-सा परिवर्तन है', 'जंग का सूत्र', 'नींबू अम्ल कौन-सा', 'pH 7 किसका' आदि। इस पृष्ठ को क्रम से पढ़ें, हर पाठ के 'याद रखें' व अंत की तालिकाएँ याद कर लें — परीक्षा के सभी तथ्य यहीं मिल जाएँगे।
1. पदार्थ व उसकी अवस्थाएँ — आधार समझें
पदार्थ (Matter) वह है जो स्थान (आयतन) घेरता है और जिसका द्रव्यमान होता है। पदार्थ बहुत छोटे कणों (अणु/परमाणु) से बना है, जिनके बीच रिक्त स्थान व आकर्षण-बल होता है। इन कणों की व्यवस्था के आधार पर पदार्थ की मुख्य तीन अवस्थाएँ होती हैं:
ठोस (Solid) — कणों के बीच आकर्षण-बल सबसे अधिक, कण पास-पास व जमे हुए। निश्चित आकार व निश्चित आयतन। उदाहरण — लोहा, बर्फ, पत्थर, लकड़ी।
द्रव (Liquid) — कणों के बीच आकर्षण मध्यम, कण थोड़ा खिसक सकते हैं। निश्चित आयतन पर आकार अनिश्चित (बर्तन का आकार ले लेता है)। उदाहरण — पानी, दूध, तेल।
गैस (Gas) — कणों के बीच आकर्षण सबसे कम, कण स्वतंत्र रूप से दूर-दूर। न आकार निश्चित, न आयतन; गैस संपीड्य (दबाई जा सकती) होती है। उदाहरण — हवा, ऑक्सीजन, भाप।
अवस्था परिवर्तन (तापमान से) — ठोस→द्रव = गलन; द्रव→गैस = वाष्पन; गैस→द्रव = संघनन; द्रव→ठोस = हिमीकरण/जमना; ठोस सीधे गैस = ऊर्ध्वपातन (Sublimation, जैसे कपूर, नौसादर, शुष्क बर्फ)।
तापमान बढ़ाने पर कण तेज़ कंपन करते हैं और पदार्थ ठोस से द्रव, फिर गैस की ओर बदलता है। प्लाज्मा (तारों/सूर्य की अवस्था) व बोस-आइंस्टीन कंडनसेट (BEC) को पदार्थ की चौथी व पाँचवीं अवस्था माना जाता है, पर CET के लिए मुख्यतः तीन अवस्थाएँ ही पर्याप्त हैं।
बर्फ का पिघलना — अवस्था परिवर्तन (भौतिक)Ulflund · CC0 · Wikimedia Commons
याद रखें
पदार्थ = स्थान घेरने व द्रव्यमान वाली वस्तु; कणों से बना।
तीन मुख्य अवस्थाएँ — ठोस (निश्चित आकार+आयतन), द्रव (निश्चित आयतन), गैस (दोनों अनिश्चित)।
प्रकृति में पदार्थ निरंतर बदलते रहते हैं। इन परिवर्तनों को दो भागों में बाँटा जाता है — भौतिक (Physical) और रासायनिक (Chemical)। दोनों का अंतर पहचानना CET का सर्वाधिक पूछा जाने वाला बिंदु है।
भौतिक परिवर्तन — केवल भौतिक गुण (आकार, अवस्था, रूप) बदलते हैं, कोई नया पदार्थ नहीं बनता। यह अस्थायी व प्रायः उत्क्रमणीय (वापस लौटाने योग्य) होता है। उदाहरण — बर्फ का पिघलना, पानी का उबलना, चीनी का पानी में घुलना, काँच टूटना, चुंबकन।
रासायनिक परिवर्तन — एक या अधिक नए पदार्थ बनते हैं, मूल पदार्थ के गुण पूरी तरह बदल जाते हैं। यह प्रायः स्थायी व अनुत्क्रमणीय होता है; साथ में ऊष्मा/प्रकाश/गैस/रंग-परिवर्तन हो सकता है। उदाहरण — कागज़/लकड़ी जलना, दूध का दही जमना, लोहे में जंग, भोजन पकना, पाचन।
पहचान के संकेत (रासायनिक) — गैस के बुलबुले निकलना, रंग बदलना, ऊष्मा/प्रकाश निकलना या सोखा जाना, गंध बदलना, अवक्षेप (तलछट) बनना — इनमें से कुछ हो तो रासायनिक परिवर्तन समझें।
भ्रमित करने वाले उदाहरण — मोमबत्ती का पिघलना = भौतिक, पर मोमबत्ती का जलना = रासायनिक। पानी का भाप बनना = भौतिक, पर पानी का अपघटन (H₂+O₂) = रासायनिक।
एक सरल नियम — यदि परिवर्तन के बाद बना पदार्थ आसानी से पुनः मूल रूप में आ सकता है तो भौतिक, और यदि बिल्कुल नया पदार्थ बन गया जो लौटाया नहीं जा सकता तो रासायनिक। भोजन का पाचन, श्वसन, किण्वन (फर्मेंटेशन), फलों का पकना — ये सब रासायनिक परिवर्तन हैं।
याद रखें
भौतिक = नया पदार्थ नहीं, अस्थायी, उत्क्रमणीय (बर्फ पिघलना, चीनी घुलना)।
रासायनिक = नया पदार्थ बनता है, स्थायी, अनुत्क्रमणीय (कागज़ जलना, दही जमना, जंग)।
दही जमना · दूध फटना · भोजन पचना · जंग लगना = रासायनिक परिवर्तन।
मोम पिघलना = भौतिक; मोम जलना = रासायनिक।
2.1 मिश्रण के घटक अलग करने की विधियाँ (भौतिक प्रक्रम)
मिश्रण के घटक भौतिक विधियों से अलग होते हैं — कोई नया पदार्थ नहीं बनता। परीक्षा 'कौन-सा मिश्रण किस विधि से' पूछती है:
प्रभाजी आसवन (Fractional distillation) — मिश्रणीय द्रव जिनके क्वथनांक में अंतर कम (25 K से कम) हो — ऐल्कोहॉल और जल; कच्चे तेल के घटक; वायु से गैसें। अंतर अधिक हो तो साधारण आसवन।
अपकेन्द्रण (Centrifugation) — तेज़ी से घुमाने पर सघन कण नीचे, हल्के ऊपर — दूध से क्रीम (मक्खन), रक्त/मूत्र की जाँच, वाशिंग मशीन का ड्रायर।
अधिशोषण (Adsorption) — पदार्थ का किसी ठोस की सतह पर जमना — चारकोल (सक्रियित काष्ठ-कोयला) से रंग हटाना, गैस मास्क।
ऊर्ध्वपातन (Sublimation) — ठोस सीधा वाष्प — कपूर, नैफ्थलीन, अमोनियम क्लोराइड, आयोडीन को अलग करना।
पृथक्कारी कीप — अमिश्रणीय द्रव — तेल और जल।
क्रोमैटोग्राफी — स्याही/रंजक के रंग, रक्त में ड्रग्स।
निस्यंदन, वाष्पन, क्रिस्टलीकरण — अघुलनशील ठोस छानना; समुद्री जल से नमक; शुद्ध क्रिस्टल (फिटकरी, कॉपर सल्फेट)।
याद रखें
ऐल्कोहॉल + जल → प्रभाजी आसवन · दूध से क्रीम → अपकेन्द्रण · चारकोल से रंग हटाना → अधिशोषण · कपूर → ऊर्ध्वपातन · तेल + जल → पृथक्कारी कीप।
3. रासायनिक अभिक्रिया व उसके चार प्रकार
जब दो या अधिक पदार्थ (अभिकारक/Reactants) आपस में क्रिया करके नए पदार्थ (उत्पाद/Products) बनाते हैं, तो इसे रासायनिक अभिक्रिया कहते हैं। इसे रासायनिक समीकरण से लिखा जाता है। अभिक्रियाओं के मुख्य चार प्रकार हैं:
संयोजन (Combination) — दो या अधिक पदार्थ मिलकर एक नया पदार्थ बनाते हैं — A + B → AB। उदाहरण — कैल्शियम ऑक्साइड + जल → कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड (बुझा चूना); कार्बन + ऑक्सीजन → CO₂।
वियोजन/अपघटन (Decomposition) — एक पदार्थ टूटकर दो या अधिक नए पदार्थ बनाता है — AB → A + B। ऊष्मा, प्रकाश या विद्युत से होता है। उदाहरण — चूना पत्थर (CaCO₃) गर्म करने पर CaO + CO₂; जल का विद्युत-अपघटन → H₂ + O₂।
विस्थापन (Displacement) — अधिक क्रियाशील तत्व कम क्रियाशील तत्व को उसके यौगिक से हटा देता है — A + BC → AC + B। उदाहरण — लोहा + कॉपर सल्फेट → फेरस सल्फेट + कॉपर (नीला रंग फीका पड़ता है)।
द्विविस्थापन (Double Displacement) — दो यौगिकों के आयन आपस में स्थान बदल लेते हैं — AB + CD → AD + CB। प्रायः अवक्षेप बनता है। उदाहरण — सोडियम सल्फेट + बेरियम क्लोराइड → बेरियम सल्फेट (सफेद अवक्षेप) + सोडियम क्लोराइड, यानी Na₂SO₄ (aq) + BaCl₂ (aq) → BaSO₄ (s) + 2NaCl (aq) — यहाँ अवक्षेप BaSO₄ (s) है। अम्ल+क्षार की उदासीनीकरण क्रिया भी इसी की एक प्रकार है।
अभिक्रिया के साथ ऊष्मा निकले तो 'ऊष्माक्षेपी' (Exothermic — जैसे ईंधन जलना, बुझा चूना बनना) और ऊष्मा सोखी जाए तो 'ऊष्माशोषी' (Endothermic — जैसे प्रकाश-संश्लेषण, चूना पत्थर का अपघटन)। साथ ही दो आयन मिलकर ठोस अघुलनशील पदार्थ बनाएँ तो उसे 'अवक्षेप' (Precipitate) कहते हैं।
याद रखें
चार प्रकार — संयोजन, वियोजन (अपघटन), विस्थापन, द्विविस्थापन।
रेडॉक्स (Redox = Reduction + Oxidation) वह अभिक्रिया है जिसमें ऑक्सीकरण और अपचयन एक साथ होते हैं। सरल भाषा में — ऑक्सीजन/इलेक्ट्रॉन के लेन-देन की क्रिया।
ऑक्सीकरण (Oxidation) — ऑक्सीजन का जुड़ना या हाइड्रोजन का हटना; अथवा इलेक्ट्रॉन का त्याग (खोना)। उदाहरण — कार्बन + O₂ → CO₂; लोहे का जंग लगना।
अपचयन (Reduction) — ऑक्सीजन का हटना या हाइड्रोजन का जुड़ना; अथवा इलेक्ट्रॉन ग्रहण (लेना)। उदाहरण — कॉपर ऑक्साइड + H₂ → कॉपर + जल (यहाँ CuO का अपचयन)।
दोनों साथ-साथ — जिस अभिक्रिया में एक पदार्थ का ऑक्सीकरण और दूसरे का अपचयन एक ही समय हो, उसे रेडॉक्स कहते हैं। जो स्वयं अपचयित होकर दूसरे का ऑक्सीकरण करे = 'ऑक्सीकारक'; जो स्वयं ऑक्सीकृत होकर दूसरे का अपचयन करे = 'अपचायक'।
याद रखने का सूत्र — OIL RIG — Oxidation Is Loss (इलेक्ट्रॉन की हानि), Reduction Is Gain (इलेक्ट्रॉन का लाभ)। यानी 'खोना = ऑक्सीकरण, पाना = अपचयन'।
दैनिक जीवन में रेडॉक्स — श्वसन (भोजन का ऑक्सीकरण), दहन (ईंधन जलना), लोहे में जंग, बैटरी/सेल का कार्य, तथा कटे सेब/आलू का भूरा पड़ना सभी रेडॉक्स (ऑक्सीकरण) के उदाहरण हैं।
याद रखें
रेडॉक्स = ऑक्सीकरण + अपचयन एक साथ।
ऑक्सीकरण = O जुड़े / H हटे / इलेक्ट्रॉन खोना; अपचयन = इसका उल्टा।
OIL RIG — Oxidation Is Loss, Reduction Is Gain (इलेक्ट्रॉन के लिए)।
श्वसन, दहन, जंग, बैटरी = दैनिक रेडॉक्स उदाहरण।
5. संक्षारण (जंग) व विकृतगंधिता
रेडॉक्स के दो बहुत महत्वपूर्ण दैनिक उदाहरण हैं — धातुओं का संक्षारण (जंग) और वसा/तेल की विकृतगंधिता। दोनों पर CET में सीधे प्रश्न आते हैं।
संक्षारण (Corrosion) — हवा की नमी (जल) व ऑक्सीजन के संपर्क में धातु का धीरे-धीरे क्षय होना। लोहे पर भूरे-लाल रंग की परत = जंग; इसका रासायनिक नाम 'हाइड्रेटेड फेरिक ऑक्साइड' (Fe₂O₃·xH₂O)।
जंग के लिए आवश्यक — जंग लगने के लिए जल (नमी) और ऑक्सीजन दोनों ज़रूरी हैं; इसीलिए सूखे रेगिस्तान में या तेल/ग्रीस लगी सतह पर जंग कम लगती है।
जंग से बचाव के उपाय — पेंट/ग्रीस/तेल लगाना, गैल्वनीकरण (लोहे पर जस्ते/ज़िंक की परत), क्रोमियम/निकल की परत चढ़ाना (विद्युतलेपन), तथा मिश्रधातु बनाना (जैसे स्टेनलेस स्टील — लोहा+क्रोमियम+निकल, इसमें जंग नहीं लगती)।
विकृतगंधिता (Rancidity) — वसा व तेल युक्त भोज्य पदार्थों का हवा (ऑक्सीजन) से ऑक्सीकृत होकर खराब हो जाना — स्वाद व गंध बिगड़ जाती है (जैसे रखे घी/चिप्स में बासी गंध)। रोकथाम — वायुरोधी पैकिंग, प्रतिऑक्सीकारक (Antioxidant) मिलाना, फ्रिज में रखना, तथा पैकेट में नाइट्रोजन गैस भरना।
ध्यान दें — चाँदी पर काली परत (सिल्वर सल्फाइड) व ताँबे पर हरी परत (बेसिक कॉपर कार्बोनेट) भी संक्षारण के ही उदाहरण हैं। जंग व विकृतगंधिता दोनों मूलतः 'ऑक्सीकरण' की क्रियाएँ हैं, इसलिए दोनों को ऑक्सीजन से बचाकर रोका जाता है।
लोहे में जंग — संक्षारण (हाइड्रेटेड फेरिक ऑक्साइड)Paulnasca · CC BY 2.0 · Wikimedia Commons
विकृतगंधिता = तेल/घी का ऑक्सीकरण; रोके — एंटीऑक्सीडेंट, नाइट्रोजन पैकिंग।
6. अम्ल, क्षार व लवण — पहचान व गुण
स्वाद, स्पर्श व सूचकों (Indicators) के व्यवहार के आधार पर पदार्थों को अम्ल, क्षार व लवण में बाँटा जाता है। यह दैनिक विज्ञान का अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है।
अम्ल (Acid) — स्वाद में खट्टे; जल में H⁺ (हाइड्रोजन) आयन देते हैं; नीले लिटमस को लाल कर देते हैं। उदाहरण — HCl (हाइड्रोक्लोरिक), H₂SO₄ (सल्फ्यूरिक — 'रसायनों का राजा'), HNO₃ (नाइट्रिक), तथा सिरका (एसीटिक), नींबू (साइट्रिक) जैसे कार्बनिक अम्ल।
क्षार/भस्म (Base/Alkali) — स्वाद में कड़वे, स्पर्श में साबुन जैसे चिकने; जल में OH⁻ (हाइड्रॉक्साइड) आयन देते हैं; लाल लिटमस को नीला कर देते हैं। उदाहरण — NaOH (कास्टिक सोडा), KOH, Ca(OH)₂ (बुझा चूना), NH₄OH, मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड (मिल्क ऑफ मैग्नीशिया)।
उदासीनीकरण (Neutralization) — अम्ल + क्षार → लवण + जल। यह ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है। उदाहरण — NaOH + HCl → NaCl (नमक) + H₂O। पेट की अम्लता (एसिडिटी) में मिल्क ऑफ मैग्नीशिया (क्षार) यही उदासीनीकरण करता है।
लवण (Salt) — अम्ल व क्षार की क्रिया से बना उदासीन यौगिक। सामान्य नमक = NaCl (सोडियम क्लोराइड)। धोने का सोडा = Na₂CO₃·10H₂O; खाने का सोडा = NaHCO₃; प्लास्टर ऑफ पेरिस = CaSO₄·½H₂O; ब्लीचिंग पाउडर = CaOCl₂।
सूचक (Indicator) वे पदार्थ हैं जो अम्ल/क्षार में रंग बदलकर पहचान कराते हैं — लिटमस, हल्दी (क्षार में लाल-भूरी), फिनॉल्फथेलिन (क्षार में गुलाबी, अम्ल में रंगहीन), मिथाइल ऑरेंज। 'खट्टा = अम्ल, कड़वा-चिकना = क्षार' यह आधार-नियम सदा याद रखें।
अम्ल + क्षार → लवण + जल (उदासीनीकरण, ऊष्माक्षेपी)।
धोने का सोडा Na₂CO₃·10H₂O; खाने का सोडा NaHCO₃; PoP = CaSO₄·½H₂O।
7. pH मान — अम्लीयता-क्षारीयता का पैमाना
किसी विलयन में अम्ल या क्षार की प्रबलता मापने का पैमाना 'pH मान' (Power of Hydrogen) कहलाता है। इसे डेनमार्क के वैज्ञानिक 'सोरेन सोरेनसेन' (1909) ने प्रस्तुत किया। यह 0 से 14 तक होता है:
pH 7 = उदासीन — शुद्ध जल का pH ठीक 7 होता है — न अम्लीय, न क्षारीय। रक्त का pH लगभग 7.4 (हल्का क्षारीय) होता है।
pH < 7 = अम्लीय — मान जितना कम (0 की ओर), उतना प्रबल अम्ल। उदाहरण — नींबू ~2, सिरका ~3, जठर-रस (HCl) ~1.5-2, कोल्ड ड्रिंक/कॉफी अम्लीय।
pH > 7 = क्षारीय — मान जितना अधिक (14 की ओर), उतना प्रबल क्षार। उदाहरण — खाने का सोडा ~9, मिल्क ऑफ मैग्नीशिया ~10, चूने का पानी ~12, NaOH ~14।
दैनिक जीवन में pH — दंत-क्षय (कैविटी) तब बढ़ता है जब मुँह का pH 5.5 से नीचे आता है; मंजन (क्षारीय) इसे रोकता है। पौधों की अच्छी वृद्धि के लिए मिट्टी का pH उपयुक्त चाहिए — अम्लीय मिट्टी में चूना डालते हैं। मधुमक्खी/चींटी के डंक में फॉर्मिक अम्ल होता है, जिस पर बेकिंग सोडा (क्षार) लगाते हैं।
pH को सार्वत्रिक सूचक (Universal Indicator) या pH पेपर से नापते हैं, जो विभिन्न मानों पर अलग-अलग रंग देता है। याद रखें — pH स्केल पर 1 अंक का अंतर अम्लीयता में 10 गुना अंतर दर्शाता है। 'अम्ल वर्षा' (Acid Rain) का pH 5.6 से कम होता है, जो SO₂ व NO₂ गैसों से बनती है।
इस अध्याय की असली परीक्षा 'दैनिक जीवन के उदाहरण' से होती है — कौन-सा रसायन कहाँ काम आता है, घर के पदार्थों के रासायनिक नाम क्या हैं। ये तथ्य सीधे पूछे जाते हैं:
रसोई व घर के रसायन — खाने का सोडा (NaHCO₃) — बेकिंग में फुलाने हेतु; धोने का सोडा (Na₂CO₃·10H₂O) — कपड़े धोने में; सामान्य नमक (NaCl); सिरका (एसीटिक अम्ल); नींबू (साइट्रिक अम्ल); खट्टे दूध/दही में (लैक्टिक अम्ल)।
उपयोगी अभिक्रियाएँ — प्रकाश-संश्लेषण (ऊष्माशोषी, पौधों में भोजन बनना); किण्वन (दूध→दही, आटा फूलना, शराब बनना); दहन (ईंधन जलना); अग्निशामक में CO₂ (जलना रोके); फोटोग्राफी में सिल्वर हैलाइड का अपघटन।
हानिकारक/सतर्कता — अम्ल वर्षा (SO₂, NO₂ से) इमारतों-फसलों को हानि; ताजमहल पर 'मार्बल कैंसर' इसी का प्रभाव; गैल्वनीकृत बर्तन में खट्टी चीज़ रखने से ज़िंक घुलकर हानि।
एक सूत्र-वाक्य — 'घर के सोडे दो हैं': खाने का सोडा (NaHCO₃, एक 'H' व बाइकार्बोनेट) और धोने का सोडा (Na₂CO₃, क्रिस्टल युक्त, 10 जल अणु)। इन्हें भ्रमित न करें — CET में इनके सूत्र व उपयोग बार-बार पूछे जाते हैं।
प्रकाश-संश्लेषण = ऊष्माशोषी; किण्वन/दहन = रासायनिक परिवर्तन।
अम्ल वर्षा = 'मार्बल कैंसर' (ताजमहल को क्षति)।
पदार्थ व रासायनिक अभिक्रियाएँ — झलकियाँ
लिटमस सूचक — अम्ल व क्षार की पहचानChemicalinterest · Public domain · Wikimedia CommonspH पैमाना (0–14) — अम्लीयता व क्षारीयताAlvy16 · CC BY 4.0 · Wikimedia Commons
परीक्षा-उपयोगी तालिकाएँ
पदार्थ की तीन अवस्थाएँ
अवस्था
आकार / आयतन
ठोस
निश्चित आकार + निश्चित आयतन (कण जमे)
द्रव
अनिश्चित आकार + निश्चित आयतन
गैस
अनिश्चित आकार + अनिश्चित आयतन (संपीड्य)
आकर्षण-बल
ठोस > द्रव > गैस
भौतिक बनाम रासायनिक परिवर्तन
भौतिक परिवर्तन
रासायनिक परिवर्तन
नया पदार्थ नहीं बनता
नया पदार्थ बनता है
अस्थायी / उत्क्रमणीय
स्थायी / अनुत्क्रमणीय
बर्फ पिघलना, चीनी घुलना
कागज़ जलना, दही जमना
मोम पिघलना, काँच टूटना
जंग लगना, भोजन पकना
रासायनिक अभिक्रिया के प्रकार
प्रकार
रूप व उदाहरण
संयोजन
A+B→AB (CaO + H₂O → बुझा चूना)
वियोजन/अपघटन
AB→A+B (CaCO₃ → CaO + CO₂)
विस्थापन
A+BC→AC+B (Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu)
द्विविस्थापन
AB+CD→AD+CB (अवक्षेप बने)
अम्ल बनाम क्षार — पहचान
गुण
अम्ल / क्षार
स्वाद
अम्ल = खट्टा; क्षार = कड़वा
आयन
अम्ल = H⁺; क्षार = OH⁻
लिटमस
अम्ल: नीला→लाल; क्षार: लाल→नीला
pH मान
अम्ल < 7; क्षार > 7
प्राकृतिक स्रोत → अम्ल
स्रोत
अम्ल
नींबू / संतरा
साइट्रिक अम्ल
सिरका
एसीटिक अम्ल
इमली / अंगूर
टार्टरिक अम्ल
सेब
मैलिक अम्ल
दही / खट्टा दूध
लैक्टिक अम्ल
चींटी / मधुमक्खी डंक
फॉर्मिक अम्ल
टमाटर
ऑक्ज़ैलिक अम्ल
घरेलू पदार्थ → रासायनिक सूत्र/नाम
पदार्थ
रासायनिक सूत्र / नाम
खाने का सोडा
NaHCO₃ (सोडियम बाइकार्बोनेट)
धोने का सोडा
Na₂CO₃·10H₂O
सामान्य नमक
NaCl (सोडियम क्लोराइड)
बुझा चूना
Ca(OH)₂
प्लास्टर ऑफ पेरिस
CaSO₄·½H₂O
जंग
Fe₂O₃·xH₂O (हाइड्रेटेड फेरिक ऑक्साइड)
pH मान — दैनिक उदाहरण
पदार्थ
लगभग pH व प्रकृति
जठर-रस (HCl)
~1.5–2 (प्रबल अम्लीय)
नींबू / सिरका
~2–3 (अम्लीय)
शुद्ध जल
7 (उदासीन)
रक्त
~7.4 (हल्का क्षारीय)
खाने का सोडा
~9 (क्षारीय)
NaOH (कास्टिक सोडा)
~14 (प्रबल क्षारीय)
शब्दावली — अंग्रेज़ी पद का अर्थ
पदार्थ (Matter)
स्थान घेरने व द्रव्यमान वाली प्रत्येक वस्तु; कणों (अणु/परमाणु) से बना।
ऊर्ध्वपातन (Sublimation)
ठोस का बिना द्रव बने सीधे गैस में बदलना (कपूर, नौसादर, शुष्क बर्फ)।
भौतिक परिवर्तन
जिसमें नया पदार्थ न बने, केवल रूप/अवस्था बदले; प्रायः उत्क्रमणीय।
रासायनिक परिवर्तन
जिसमें नया पदार्थ बने व गुण बदल जाएँ; प्रायः अनुत्क्रमणीय।
अभिकारक / उत्पाद
अभिक्रिया से पहले के पदार्थ = अभिकारक; बाद में बने = उत्पाद।
अवक्षेप (Precipitate)
अभिक्रिया में बना अघुलनशील ठोस तलछट (द्विविस्थापन में)।
ऊष्माक्षेपी / ऊष्माशोषी
ऊष्मा निकालने वाली / ऊष्मा सोखने वाली अभिक्रिया।
रेडॉक्स (Redox)
जिसमें ऑक्सीकरण व अपचयन एक साथ हों।
संक्षारण (Corrosion)
नमी-ऑक्सीजन से धातु का धीरे-धीरे क्षय; लोहे का जंग इसका उदाहरण।
विकृतगंधिता (Rancidity)
तेल/वसा का ऑक्सीकरण से बासी होकर स्वाद-गंध बिगड़ना।
उदासीनीकरण
अम्ल + क्षार → लवण + जल की अभिक्रिया।
pH मान
विलयन की अम्लीयता/क्षारीयता मापने का 0–14 पैमाना (7 = उदासीन)।
वास्तविक RPSC CET प्रश्न · सामग्री हस्तलिखित व सत्यापित