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राजस्थान के उद्योग व खनिज

उद्योगों का वर्गीकरण · सीमेंट-सूती वस्त्र-ऊन-चीनी-संगमरमर-हस्तशिल्प · RIICO व RFC · औद्योगिक क्षेत्र/SEZ · खनिज आधारित उद्योग व उद्योग↔केंद्र — संपूर्ण अध्याय
संगमरमर की खदान, जयपुर के निकट — खनिज-आधारित उद्योग राजस्थान की पहचान (मकराना का संगमरमर ताजमहल में लगा)
संगमरमर की खदान, जयपुर के निकट — खनिज-आधारित उद्योग राजस्थान की पहचान (मकराना का संगमरमर ताजमहल में लगा)
Yann Forget · CC BY-SA 4.0 · Wikimedia Commons

शुरू करने से पहले

किसी राज्य की अर्थव्यवस्था में उद्योग रोजगार, आय व विकास का सबसे बड़ा साधन होते हैं। राजस्थान मूलतः कृषि-प्रधान राज्य रहा है, पर खनिजों की प्रचुरता के कारण यहाँ खनिज-आधारित उद्योगों (सीमेंट, संगमरमर, संगमरमर-कटाई, ज़िंक) का अच्छा विकास हुआ है। यह अध्याय छह भागों में समझाया गया है — (1) उद्योगों का वर्गीकरण (वृहद्/मध्यम/लघु/कुटीर), (2) प्रमुख उद्योग — सीमेंट, सूती वस्त्र, ऊन, चीनी, संगमरमर व हस्तशिल्प, (3) औद्योगिक वित्त-संस्थान RIICO व RFC, (4) औद्योगिक क्षेत्र, औद्योगिक नगर व SEZ, (5) खनिज-आधारित उद्योग, और (6) उद्योग↔केंद्र (कौन-सा उद्योग किस शहर में) का मिलान। CET में यहाँ से 'अमुक उद्योग का केंद्र कहाँ है', 'पहली सूती मिल कहाँ', 'RIICO/RFC की स्थापना कब', 'सबसे बड़ा/पहला SEZ' तथा हस्तशिल्प↔शहर के सीधे व मिलान-प्रश्न आते हैं। नीचे हर भाग को शून्य से समझें और तालिका-मानचित्र से दोहराएँ।

1. उद्योगों का वर्गीकरण — वृहद्, मध्यम, लघु व कुटीर

उद्योग (Industry) का अर्थ है — कच्चे माल को प्रसंस्करण द्वारा उपयोगी वस्तु में बदलना। पूँजी-निवेश व उत्पादन के आकार के आधार पर उद्योगों को मुख्यतः चार वर्गों में बाँटा जाता है:

वर्गीकरण का आधार बदलता रहा है — पहले 'विनियोजित पूँजी' (Investment) के आधार पर तय होता था; अब केंद्र सरकार ने MSME को पूँजी-निवेश व वार्षिक टर्नओवर दोनों के आधार पर सूक्ष्म (Micro), लघु (Small) व मध्यम (Medium) में बाँटा है। राजस्थान में संख्या की दृष्टि से सबसे अधिक इकाइयाँ लघु व कुटीर उद्योगों की हैं, जबकि उत्पादन-मूल्य की दृष्टि से वृहद् उद्योग (विशेषतः सीमेंट व ज़िंक) आगे हैं।

याद रखें
  • वर्गीकरण — वृहद्, मध्यम, लघु व कुटीर (आधार: पूँजी-निवेश व टर्नओवर)।
  • संख्या में सर्वाधिक = लघु व कुटीर उद्योग; ये सर्वाधिक रोजगार देते हैं।
  • उत्पादन-मूल्य में आगे = वृहद् उद्योग (सीमेंट, ज़िंक)।
  • कुटीर उद्योग = श्रम-प्रधान, घर पर हाथ से (हस्तशिल्प, खादी, हथकरघा)।

2. सीमेंट उद्योग — राजस्थान का अग्रणी वृहद् उद्योग

सीमेंट उद्योग राजस्थान का सबसे महत्वपूर्ण व अग्रणी खनिज-आधारित वृहद् उद्योग है। इसका कच्चा माल चूना-पत्थर (Limestone) व जिप्सम है, जो राज्य में प्रचुर मात्रा में मिलता है। राजस्थान सीमेंट उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में है।

श्री सीमेंट (Shree Cement) का मुख्यालय ब्यावर (अजमेर/अब ब्यावर जिला) में है और यह राज्य की सबसे बड़ी सीमेंट कंपनियों में है। निम्बाहेड़ा (चित्तौड़गढ़) सीमेंट उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है, इसी कारण चित्तौड़गढ़ को राजस्थान का प्रमुख सीमेंट जिला कहते हैं।

सीमेंट कारखाना — चूना-पत्थर पर आधारित राजस्थान का अग्रणी वृहद् उद्योग
सीमेंट कारखाना — चूना-पत्थर पर आधारित राजस्थान का अग्रणी वृहद् उद्योग
Biswarup Ganguly · CC BY-SA 3.0 · Wikimedia Commons
याद रखें
  • पहला सीमेंट कारखाना — लाखेरी (बूँदी), 1915 (सबसे पुराना)।
  • कच्चा माल — चूना-पत्थर व जिप्सम; मुख्य जिला — चित्तौड़गढ़ (निम्बाहेड़ा)।
  • श्री सीमेंट = ब्यावर; जे.के. सीमेंट = निम्बाहेड़ा; बिड़ला = चित्तौड़गढ़/सवाई माधोपुर।
  • नागौर (मुंडवा-गोटन), सिरोही, ब्यावर, जैसलमेर भी सीमेंट केंद्र।

3. सूती वस्त्र, ऊन व चीनी उद्योग

वस्त्र उद्योग राजस्थान का सबसे पुराना संगठित उद्योग है। इसमें सूती वस्त्र (कपास से), ऊनी वस्त्र (भेड़ की ऊन से) व सिंथेटिक/कृत्रिम वस्त्र शामिल हैं। साथ ही गन्ने से चीनी उद्योग भी कृषि-आधारित प्रमुख उद्योग है।

ऊन के मामले में राजस्थान देश में प्रथम है — यहाँ चोकला, मगरा, मारवाड़ी, जैसलमेरी आदि भेड़ नस्लें ऊन देती हैं। 'द कृष्णा मिल्स (ब्यावर, 1889)' राज्य की पहली व सबसे पुरानी सूती मिल है, जबकि भीलवाड़ा आज सूती वस्त्र का सबसे बड़ा केंद्र (वस्त्र नगरी) है।

याद रखें
  • पहली सूती मिल — द कृष्णा मिल्स, ब्यावर (1889); सबसे पुरानी।
  • भीलवाड़ा = वस्त्र नगरी (Textile City); सूटिंग-शर्टिंग में अग्रणी।
  • ऊन — राजस्थान देश में प्रथम; बीकानेर = एशिया की सबसे बड़ी ऊन मंडी।
  • चीनी — पहली मिल श्रीगंगानगर; केशोरायपाटन (बूँदी) सहकारी शुगर मिल प्रसिद्ध।

4. संगमरमर व हस्तशिल्प उद्योग

राजस्थान संगमरमर (Marble) व विविध हस्तशिल्प (Handicraft) के लिए विश्व-विख्यात है। ये क्रमशः खनिज-आधारित व कुटीर उद्योग के सर्वोत्तम उदाहरण हैं।

हस्तशिल्प कुटीर उद्योग है जो ग्रामीण रोजगार व पर्यटन-निर्यात की रीढ़ है। थेवा (काँच पर सोने की कारीगरी) केवल प्रतापगढ़ की पहचान है; उस्ता कला (ऊँट की खाल पर सुनहरी चित्रकारी) बीकानेर की; और ब्लू पॉटरी (फारसी मूल की नीली मिट्टी-कला) जयपुर की विशेष पहचान है।

जयपुर की ब्लू पॉटरी — राजस्थान के प्रसिद्ध कुटीर हस्तशिल्प का उदाहरण
जयपुर की ब्लू पॉटरी — राजस्थान के प्रसिद्ध कुटीर हस्तशिल्प का उदाहरण
Atcelsius · CC BY-SA 4.0 · Wikimedia Commons
याद रखें
  • मकराना (नागौर) = सफेद संगमरमर (ताजमहल); सबसे प्रसिद्ध खान।
  • किशनगढ़ (अजमेर) = एशिया की सबसे बड़ी संगमरमर मंडी (मार्बल सिटी)।
  • हस्तशिल्प — थेवा=प्रतापगढ़, उस्ता=बीकानेर, ब्लू पॉटरी/मीनाकारी=जयपुर।
  • हरा संगमरमर=उदयपुर/राजसमंद; काला=भैंसलाना (जयपुर)।

5. औद्योगिक संस्थान — RIICO व RFC

उद्योगों को भूमि, बिजली, सड़क व ऋण उपलब्ध कराने के लिए राज्य ने विशेष संस्थान बनाए हैं। इनमें दो सबसे महत्वपूर्ण हैं — RIICO (औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने वाला) व RFC (वित्तीय ऋण देने वाला)।

मूल बात याद रखें — RIICO जमीन व औद्योगिक क्षेत्र देता है (विकास), जबकि RFC पैसा/ऋण देता है (वित्त)। दोनों का मुख्यालय जयपुर है। RFC राज्य का सबसे पुराना औद्योगिक वित्त-संस्थान (1955) है।

याद रखें
  • RIICO — औद्योगिक क्षेत्र/SEZ विकसित; मुख्यालय जयपुर (RIICO नाम 1980)।
  • RFC — लघु/मध्यम उद्योगों को ऋण; स्थापना 1955; मुख्यालय जयपुर।
  • RIICO = ज़मीन/विकास, RFC = ऋण/वित्त (यह अंतर पक्का करें)।
  • RSIC (1961) = कच्चा माल व विपणन; DIC = जिला स्तर पर उद्योग-केंद्र।

6. औद्योगिक क्षेत्र, औद्योगिक नगर व SEZ

उद्योगों को एक स्थान पर सुविधा-युक्त भूमि देने के लिए RIICO 'औद्योगिक क्षेत्र' (Industrial Areas) विकसित करता है। निर्यात बढ़ाने के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ — Special Economic Zone) बनाए जाते हैं, जहाँ कर-छूट व विशेष सुविधाएँ मिलती हैं।

भिवाड़ी (अलवर) राज्य का सबसे बड़ा व सर्वाधिक औद्योगिक रूप से विकसित नगर है (दिल्ली के निकट होने से)। सीतापुरा (जयपुर) रत्न-आभूषण SEZ के लिए और बोरानाडा (जोधपुर) हस्तशिल्प-निर्यात के लिए जाने जाते हैं। DMIC राजस्थान के लगभग 39% भू-भाग से गुजरता है।

याद रखें
  • SEZ = निर्यात-केंद्रित कर-छूट क्षेत्र; सीतापुरा (जयपुर) = रत्न-आभूषण SEZ।
  • भिवाड़ी (अलवर) = राज्य का सबसे बड़ा/प्रमुख औद्योगिक नगर (NCR)।
  • बोरानाडा (जोधपुर) = हस्तशिल्प SEZ; नीमराना (अलवर) = जापानी निवेश क्षेत्र।
  • DMIC (दिल्ली-मुंबई गलियारा) राजस्थान से होकर गुजरता है।

7. खनिज आधारित उद्योग — ज़िंक, सीमेंट, उर्वरक

खनिज-आधारित उद्योग वे हैं जिनका कच्चा माल कोई खनिज होता है। राजस्थान खनिजों का 'अजायबघर' है, इसलिए यहाँ सीमेंट (चूना-पत्थर), ज़िंक-सीसा (सीसा-जस्ता अयस्क), संगमरमर, उर्वरक (रॉक-फॉस्फेट/जिप्सम) व कांच (बालू) उद्योग खूब विकसित हैं।

ज़िंक-सीसा का स्मेल्टर 'खनिज↔उद्योग' का आदर्श उदाहरण है — खान (रामपुरा-आगूचा, भीलवाड़ा) का अयस्क पास के स्मेल्टर (देबारी/चंदेरिया) में गलाया जाता है। राजस्थान सीसा-जस्ता व सीमेंट के अलावा संगमरमर, सैंडस्टोन, जिप्सम, रॉक-फॉस्फेट जैसे खनिजों पर आधारित उद्योगों में देश में अग्रणी है।

याद रखें
  • ज़िंक स्मेल्टर — देबारी (उदयपुर) व चंदेरिया (चित्तौड़गढ़); HZL।
  • ज़िंक/सीसा-जस्ता उत्पादन — राजस्थान देश में प्रथम (रामपुरा-आगूचा खान)।
  • उर्वरक — चंबल फर्टिलाइजर्स, गड़ेपान (कोटा); रॉक-फॉस्फेट झामरकोटड़ा।
  • कांच — धौलपुर/हिंडौन; रिफाइनरी — पचपदरा (बाड़मेर)।

8. उद्योग ↔ केंद्र — मिलान का सार

CET में सबसे अधिक अंक 'कौन-सा उद्योग किस शहर/जिले में' के मिलान-प्रश्न से आते हैं। नीचे राज्य के प्रमुख उद्योगों के केंद्रों को एक साथ याद कर लें (विस्तृत तालिका भी देखें):

जयपुर 'उद्योगों की राजधानी' जैसा है — रत्न-आभूषण, मीनाकारी, ब्लू पॉटरी, गोटा-जरी सबका केंद्र। पूरे अध्याय का सार: 'कच्चा माल जहाँ, उद्योग वहीं' — सीमेंट चूना-पत्थर वाले जिलों में, ज़िंक खानों के पास, वस्त्र कपास/ऊन क्षेत्रों में।

याद रखें
  • जयपुर = रत्न-आभूषण, ब्लू पॉटरी, मीनाकारी, गोटा का केंद्र।
  • भीलवाड़ा=वस्त्र, बीकानेर=ऊन, मकराना=संगमरमर, धौलपुर=कांच।
  • ज़िंक=उदयपुर/चित्तौड़गढ़; उर्वरक=कोटा; रिफाइनरी=पचपदरा (बाड़मेर)।
  • सिद्धांत — 'कच्चा माल जहाँ, उद्योग वहीं' स्थापित होता है।

राजस्थान के प्रमुख उद्योग व उनके केंद्र

सीमेंट उद्योगवस्त्र/ऊन/चीनीसंगमरमर व हस्तशिल्पखनिज-आधारित (ज़िंक/उर्वरक/कांच)औद्योगिक नगर/SEZ
निम्बाहेड़ालाखेरीब्यावरकेशोरायपाटनभीलवाड़ाबीकानेरश्रीगंगानगरमकरानाकिशनगढ़प्रतापगढ़देबारीचंदेरियागड़ेपानधौलपुरभिवाड़ीसीतापुरा-जयपुर
किसी रंगीन बिंदु पर टैप करें — विवरण यहाँ दिखेगा।

राजस्थान के उद्योग व खनिज — झलकियाँ

परीक्षा-उपयोगी तालिकाएँ

उद्योग → प्रमुख केंद्र (मिलान)

उद्योगप्रमुख केंद्र (शहर/जिला)
सीमेंटलाखेरी-बूँदी (पहला), निम्बाहेड़ा-चित्तौड़गढ़, ब्यावर
सूती वस्त्रब्यावर (पहली मिल), भीलवाड़ा (वस्त्र नगरी), पाली
ऊन (छँटाई/मंडी)बीकानेर (एशिया की सबसे बड़ी ऊन मंडी)
चीनीश्रीगंगानगर (पहली), केशोरायपाटन-बूँदी, भोपालसागर
संगमरमरमकराना-नागौर (सफेद); किशनगढ़ (मंडी)
ज़िंक स्मेल्टरदेबारी-उदयपुर, चंदेरिया-चित्तौड़गढ़
उर्वरकगड़ेपान-कोटा (चंबल फर्टिलाइजर्स)
कांचधौलपुर, हिंडौन-करौली

हस्तशिल्प → शहर/जिला

हस्तशिल्पकेंद्र
ब्लू पॉटरी / मीनाकारीजयपुर
थेवा कला (काँच पर सोना)प्रतापगढ़
उस्ता कला (ऊँट-चमड़ा)बीकानेर
कावड़ कलाबस्सी (चित्तौड़गढ़)
नमदा / दरीटोंक, बीकानेर
मोजड़ी (जूती)जोधपुर, जयपुर
जरी-गोटाजयपुर, अजमेर

औद्योगिक संस्थान (एक नज़र)

संस्थानस्थापना · कार्य
RFC (राज. वित्त निगम)1955 · लघु-मध्यम उद्योगों को ऋण; मु. जयपुर
RSIC (लघु उद्योग निगम)1961 · कच्चा माल व विपणन
RIICO1969/1980 · औद्योगिक क्षेत्र व SEZ; मु. जयपुर
DIC (जिला उद्योग केंद्र)1978 · जिला-स्तर पर उद्योग-संवर्धन

प्रमुख SEZ / औद्योगिक नगर

स्थानविशेषता
सीतापुरा (जयपुर)रत्न-आभूषण SEZ
बोरानाडा (जोधपुर)हस्तशिल्प SEZ
भिवाड़ी (अलवर)सबसे बड़ा औद्योगिक नगर (NCR)
नीमराना (अलवर)जापानी निवेश क्षेत्र
गड़ेपान (कोटा)चंबल फर्टिलाइजर्स (उर्वरक)

विशेष 'पहला/सबसे बड़ा' तथ्य

तथ्यउत्तर
पहला सीमेंट कारखानालाखेरी (बूँदी), 1915
पहली सूती वस्त्र मिलद कृष्णा मिल्स, ब्यावर, 1889
पहली चीनी मिलश्रीगंगानगर
एशिया की सबसे बड़ी ऊन मंडीबीकानेर
एशिया की सबसे बड़ी संगमरमर मंडीकिशनगढ़ (अजमेर)
सबसे बड़ा औद्योगिक नगरभिवाड़ी (अलवर)
ज़िंक/सीसा-जस्ता उत्पादन में स्थानदेश में प्रथम

शब्दावली — अंग्रेज़ी पद का अर्थ

वृहद् उद्योग
बहुत बड़ी पूँजी व उत्पादन वाले उद्योग (सीमेंट, ज़िंक, वस्त्र मिल)।
लघु उद्योग (MSME)
कम पूँजी-निवेश वाले छोटे उद्योग; राज्य में सर्वाधिक संख्या व रोजगार।
कुटीर उद्योग
घर पर हाथ से चलने वाला श्रम-प्रधान पारंपरिक उद्योग (हस्तशिल्प, खादी)।
RIICO
राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं विनियोग निगम — औद्योगिक क्षेत्र/SEZ विकसित करता है।
RFC
राजस्थान वित्त निगम (1955) — लघु व मध्यम उद्योगों को ऋण/वित्त देता है।
SEZ
विशेष आर्थिक क्षेत्र — निर्यात-केंद्रित कर-छूट वाला विशेष औद्योगिक क्षेत्र।
स्मेल्टर
अयस्क को गलाकर शुद्ध धातु निकालने वाला कारखाना (ज़िंक स्मेल्टर देबारी)।
खनिज-आधारित उद्योग
जिनका कच्चा माल खनिज हो (सीमेंट=चूना-पत्थर, उर्वरक=रॉक-फॉस्फेट)।
वस्त्र नगरी
भीलवाड़ा का उपनाम — सूती सूटिंग-शर्टिंग का प्रमुख केंद्र।
DMIC
दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा — राजस्थान से होकर गुजरने वाली बड़ी औद्योगिक परियोजना।
थेवा कला
काँच पर सोने की महीन कारीगरी — केवल प्रतापगढ़ की पहचान।
उस्ता कला
ऊँट की खाल पर सुनहरी चित्रकारी — बीकानेर की विशेष कला।
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