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राजस्थान की अर्थव्यवस्था — संरचना

अर्थव्यवस्था की विशेषताएँ (कृषि प्रधान · मरुस्थलीय) · राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) · तीन क्षेत्रकों का योगदान · प्रति व्यक्ति आय · मानव विकास सूचकांक · राज्य बजट · आर्थिक समीक्षा आँकड़े — संपूर्ण अध्याय
राजस्थान की खेती — कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था की पहचान
राजस्थान की खेती — कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था की पहचान
Deccantrap · CC BY-SA 4.0 · Wikimedia Commons

शुरू करने से पहले

किसी राज्य की 'अर्थव्यवस्था की संरचना' से आशय है — वहाँ की आय कहाँ से आती है (खेती, उद्योग या सेवाएँ), लोग किस काम में लगे हैं, राज्य कितना कमाता-खर्च करता है, और प्रति व्यक्ति आय व जीवन-स्तर कैसा है। राजस्थान क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा राज्य है, पर यहाँ की अर्थव्यवस्था की दो मूल पहचान हैं — यह मूलतः 'कृषि प्रधान' (बड़ी आबादी खेती पर निर्भर) और 'मरुस्थलीय' (बड़ा भाग रेगिस्तानी, कम वर्षा, सिंचाई की चुनौती) है। इस अध्याय में हम सीखेंगे — राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) क्या है, तीन क्षेत्रकों (प्राथमिक/द्वितीयक/तृतीयक) का योगदान कितना है, प्रति व्यक्ति आय व मानव विकास सूचकांक (HDI) में राजस्थान की स्थिति, और राज्य बजट तथा नवीनतम 'आर्थिक समीक्षा' (Economic Review) के मुख्य आँकड़े। CET में यहाँ से GSDP में किस क्षेत्रक का सबसे बड़ा हिस्सा, प्रति व्यक्ति आय, HDI रैंक, बजट के आँकड़े और 'सबसे बड़ा/सबसे अधिक' जैसे सीधे तथ्य पूछे जाते हैं। नीचे हर भाग को शून्य से समझें और तालिकाओं से दोहराएँ।

1. अर्थव्यवस्था की संरचना — आधार समझें

'अर्थव्यवस्था' (Economy) किसी क्षेत्र में होने वाले उत्पादन, वितरण, उपभोग व आय-व्यय की पूरी व्यवस्था है। इसकी 'संरचना' (Structure) से अर्थ है — यह आय किन-किन कामों से बनती है, यानी अर्थव्यवस्था किस आधार पर टिकी है। इसे समझने के लिए सारी आर्थिक क्रियाओं को तीन क्षेत्रकों (Sectors) में बाँटा जाता है:

राजस्थान को 'कृषि प्रधान राज्य' इसलिए कहते हैं क्योंकि यहाँ की बड़ी आबादी (लगभग दो-तिहाई) प्राथमिक क्षेत्रक/कृषि पर निर्भर है। परंतु आय (GSDP) की दृष्टि से आज सबसे बड़ा हिस्सा तृतीयक (सेवा) क्षेत्रक का है — यही आधुनिक अर्थव्यवस्था की पहचान है।

याद रखें
  • तीन क्षेत्रक — प्राथमिक (कृषि/खनन), द्वितीयक (उद्योग), तृतीयक (सेवा)।
  • रोज़गार में सबसे आगे = प्राथमिक (कृषि); आय/GSDP में सबसे आगे = तृतीयक (सेवा)।
  • राजस्थान की दो पहचान — कृषि प्रधान व मरुस्थलीय।

2. राजस्थान की अर्थव्यवस्था की विशेषताएँ — कृषि प्रधान व मरुस्थलीय

राजस्थान की अर्थव्यवस्था की अपनी अलग पहचान है, जो इसकी भौगोलिक स्थिति (विशाल मरुस्थल, कम वर्षा) से बनी है। इसकी मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:

संक्षेप में — राजस्थान की अर्थव्यवस्था 'कृषि प्रधान + पशुधन प्रधान + खनिज समृद्ध' किंतु 'मरुस्थलीय व जल-संकट ग्रस्त' है। पर्यटन व सौर ऊर्जा इसके उभरते मज़बूत स्तंभ हैं।

राजस्थान विधानसभा — जहाँ राज्य बजट व आर्थिक समीक्षा प्रस्तुत होती है
राजस्थान विधानसभा — जहाँ राज्य बजट व आर्थिक समीक्षा प्रस्तुत होती है
Subodhgadgil · CC BY-SA 4.0 · Wikimedia Commons
याद रखें
  • थार मरुस्थल राज्य के ~61% क्षेत्र में — इसलिए 'मरुस्थलीय' अर्थव्यवस्था।
  • ~दो-तिहाई आबादी कृषि/पशुपालन पर निर्भर — 'कृषि प्रधान'।
  • 'खनिजों का अजायबघर' — खनन व उद्योग का आधार; पर्यटन व सौर ऊर्जा उभरते स्तंभ।

3. राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) — क्या है व कैसे मापते हैं

राज्य घरेलू उत्पाद (Gross State Domestic Product — GSDP) किसी राज्य की सीमा के भीतर एक वर्ष में उत्पादित समस्त अंतिम वस्तुओं व सेवाओं का कुल बाज़ार मूल्य है। यह राज्य की अर्थव्यवस्था के 'आकार' को मापने का सबसे प्रमुख पैमाना है।

GSDP जितना बड़ा व जितनी तेज़ी से बढ़े, अर्थव्यवस्था उतनी मज़बूत मानी जाती है। राजस्थान सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक राज्य को '350 अरब डॉलर (US$350 billion)' की अर्थव्यवस्था बनाना है।

याद रखें
  • GSDP = राज्य की सीमा में एक वर्ष की कुल वस्तुओं-सेवाओं का बाज़ार मूल्य।
  • NSDP = GSDP − मूल्यह्रास; आधार वर्ष = 2011-12।
  • राजस्थान का GSDP (प्रचलित मूल्य) ~₹17 लाख करोड़; देश की GDP में योगदान ~5%।

4. तीन क्षेत्रकों का योगदान — किसका कितना हिस्सा

GSDP में तीनों क्षेत्रकों का अलग-अलग हिस्सा होता है। जैसे-जैसे राज्य विकसित होता है, प्राथमिक (कृषि) का हिस्सा घटता है और तृतीयक (सेवा) का हिस्सा बढ़ता है। राजस्थान में वर्तमान संरचना मोटे तौर पर इस प्रकार है:

याद रखें — आय/GSDP (GSVA) की दृष्टि से सबसे बड़ा हिस्सा तृतीयक (सेवा ~46%) का है; इसके बाद द्वितीयक व प्राथमिक का हिस्सा लगभग बराबर (~27%-27%) है (नवीनतम आँकड़ों में द्वितीयक प्राथमिक से थोड़ा अधिक)। परंतु रोज़गार की दृष्टि से सबसे अधिक लोग प्राथमिक (कृषि) में लगे हैं। आय व रोज़गार के क्रम को अलग रखना ज़रूरी है।

याद रखें
  • GSDP/GSVA में हिस्सा — तृतीयक (~46%, सबसे बड़ा) > द्वितीयक (~27%) ≈ प्राथमिक (~27%)।
  • सबसे बड़ा योगदान = तृतीयक (सेवा) क्षेत्रक का।
  • कृषि का हिस्सा देश के औसत से अधिक — इसलिए 'कृषि प्रधान'।

5. प्रति व्यक्ति आय — राजस्थान की स्थिति

प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) = राज्य की कुल निवल आय (NSDP) को कुल जनसंख्या से भाग देने पर मिलने वाला औसत। यह जीवन-स्तर व समृद्धि मापने का प्रमुख पैमाना है।

प्रति व्यक्ति आय बढ़ना अर्थव्यवस्था के सुधार का संकेत है, पर राजस्थान का राष्ट्रीय औसत से पीछे रहना यह दर्शाता है कि अभी आय व विकास में अंतर पाटना बाकी है।

याद रखें
  • प्रति व्यक्ति आय = NSDP ÷ कुल जनसंख्या।
  • राजस्थान की प्रति व्यक्ति आय ~₹1.85 लाख (प्रचलित मूल्य) — बढ़ रही है।
  • यह राष्ट्रीय औसत से कम है — राज्य की कमज़ोरी।

6. मानव विकास सूचकांक (HDI) — जीवन की गुणवत्ता का माप

मानव विकास सूचकांक (Human Development Index — HDI) केवल आय नहीं, बल्कि लोगों के जीवन की गुणवत्ता मापता है। इसे संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने 1990 में पाकिस्तानी अर्थशास्त्री महबूब-उल-हक व भारतीय अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन के विचारों पर आधारित बनाया।

HDI दर्शाता है कि आर्थिक वृद्धि के साथ-साथ शिक्षा व स्वास्थ्य में सुधार भी ज़रूरी है। राजस्थान में आय तो बढ़ रही है, पर शिक्षा-स्वास्थ्य के सूचकांकों में और सुधार की आवश्यकता है।

याद रखें
  • HDI — UNDP द्वारा 1990 में; महबूब-उल-हक व अमर्त्य सेन से जुड़ा।
  • तीन आयाम — स्वास्थ्य (जीवन प्रत्याशा), शिक्षा, जीवन-स्तर (आय)।
  • मान 0 से 1; केरल भारत में HDI में सर्वोच्च; राजस्थान निचले/मध्यम स्तर पर।

7. राज्य बजट — आय व व्यय का वार्षिक लेखा

राज्य बजट (State Budget) सरकार का एक वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल से 31 मार्च) का अनुमानित आय-व्यय का ब्योरा है। संविधान में इसे 'वार्षिक वित्तीय विवरण' (अनुच्छेद 202) कहा गया है। राजस्थान में बजट वित्त मंत्री विधानसभा में प्रस्तुत करते हैं।

बजट यह तय करता है कि सरकार किन क्षेत्रों (शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, सड़क) पर कितना खर्च करेगी और पैसा कहाँ से जुटाएगी। राजस्थान का कुल बजट आकार लगातार बढ़कर लाखों करोड़ रुपये के स्तर पर पहुँच चुका है।

याद रखें
  • बजट = अनुच्छेद 202, 'वार्षिक वित्तीय विवरण'; वित्त वर्ष 1 अप्रैल–31 मार्च।
  • दो भाग — राजस्व बजट व पूँजीगत बजट।
  • राजकोषीय घाटा = कुल व्यय − कुल आय (उधारी का माप); FRBM का लक्ष्य ~3-3.5% GSDP।

8. नवीनतम आर्थिक समीक्षा — मुख्य आँकड़े (एक नज़र में)

'आर्थिक समीक्षा' (Economic Review/Survey) राज्य सरकार का वह वार्षिक दस्तावेज़ है जो बजट से ठीक पहले विधानसभा में रखा जाता है और बीते वर्ष की अर्थव्यवस्था का पूरा लेखा-जोखा देता है। CET की दृष्टि से इसके मुख्य आँकड़े इस प्रकार हैं:

नोट — आर्थिक समीक्षा के आँकड़े हर वर्ष बदलते हैं, इसलिए परीक्षा से पहले नवीनतम 'राजस्थान आर्थिक समीक्षा' के आँकड़े अवश्य देख लें। ऊपर दिए मान व्यापक रूप से स्वीकृत (हाल के वर्षों के) स्तर हैं — दिशा (किसका हिस्सा बड़ा, क्या बढ़ रहा है) हर वर्ष यही रहती है।

याद रखें
  • GSDP ~₹17 लाख करोड़ (प्रचलित मूल्य); वास्तविक वृद्धि दर ~7.8%।
  • क्षेत्रक हिस्सा — तृतीयक ~46% > द्वितीयक ~27% ≈ प्राथमिक ~27%।
  • प्रति व्यक्ति आय ~₹1.85 लाख (राष्ट्रीय औसत से कम); राजस्थान सौर ऊर्जा में अग्रणी।

राजस्थान की अर्थव्यवस्था — झलकियाँ

परीक्षा-उपयोगी तालिकाएँ

तीन क्षेत्रक — काम व GSDP में हिस्सा

क्षेत्रकमुख्य काम व अनुमानित हिस्सा
प्राथमिक (Primary)कृषि, पशुपालन, वानिकी, मत्स्य, खनन — ~27%
द्वितीयक (Secondary)उद्योग, निर्माण, बिजली, मैन्युफैक्चरिंग — ~27%
तृतीयक (Tertiary)व्यापार, परिवहन, पर्यटन, बैंक, संचार — ~46% (सबसे बड़ा)

रोज़गार बनाम आय — किसमें कौन आगे

आधारसबसे आगे क्षेत्रक
रोज़गार (कितने लोग लगे)प्राथमिक — कृषि (~दो-तिहाई आबादी)
आय / GSDP हिस्सातृतीयक — सेवा (~46%)
सबसे तेज़ बढ़तातृतीयक (सेवा) क्षेत्रक
घटता हुआ हिस्साप्राथमिक (कृषि) क्षेत्रक

प्रमुख आर्थिक पद — एक पंक्ति में

पदअर्थ / सूत्र
GSDPराज्य की सीमा में एक वर्ष का कुल उत्पादन-मूल्य
NSDPGSDP − मूल्यह्रास (निवल उत्पाद)
प्रति व्यक्ति आयNSDP ÷ कुल जनसंख्या
राजकोषीय घाटाकुल व्यय − कुल आय (उधारी का माप)
HDIस्वास्थ्य + शिक्षा + आय (मान 0 से 1)

नवीनतम समीक्षा — मुख्य आँकड़े (अनुमानित स्तर)

संकेतकमान / स्थिति
GSDP (प्रचलित मूल्य)~₹17 लाख करोड़ (2024-25)
वास्तविक वृद्धि दर~7.8% (स्थिर मूल्य)
सबसे बड़ा क्षेत्रकतृतीयक/सेवा (~46%)
प्रति व्यक्ति आय~₹1.85 लाख प्रति वर्ष
देश की GDP में योगदान~5% (~5.26%)
साक्षरता (2011)~66.1%
लिंगानुपात (2011)928

राज्य बजट — दो खाते व घाटे

शब्दअर्थ
राजस्व बजटनियमित आय-व्यय (वेतन, ब्याज, अनुदान)
पूँजीगत बजटसड़क-बाँध-भवन व परिसंपत्ति पर व्यय/उधारी
राजस्व घाटाराजस्व व्यय > राजस्व आय
राजकोषीय घाटाकुल व्यय > कुल आय (उधार सहित)
बजट का अनुच्छेदअनुच्छेद 202 — 'वार्षिक वित्तीय विवरण'

शब्दावली — अंग्रेज़ी पद का अर्थ

अर्थव्यवस्था की संरचना
अर्थव्यवस्था किन क्षेत्रकों (कृषि/उद्योग/सेवा) पर टिकी है — उनका आपसी हिस्सा।
GSDP
सकल राज्य घरेलू उत्पाद — राज्य की सीमा में एक वर्ष की समस्त वस्तुओं-सेवाओं का बाज़ार मूल्य।
NSDP
निवल राज्य घरेलू उत्पाद = GSDP − मूल्यह्रास।
मूल्यह्रास (Depreciation)
उत्पादन में लगी मशीनों/परिसंपत्तियों की समय के साथ घिसावट/मूल्य-कमी।
प्राथमिक क्षेत्रक
प्रकृति से सीधे जुड़े काम — कृषि, पशुपालन, वानिकी, खनन।
द्वितीयक क्षेत्रक
कच्चे माल से वस्तु बनाने वाले काम — उद्योग व निर्माण (औद्योगिक क्षेत्रक)।
तृतीयक क्षेत्रक
सेवाएँ देने वाले काम — व्यापार, परिवहन, पर्यटन, बैंक (सेवा क्षेत्रक)।
प्रति व्यक्ति आय
औसत आय = निवल राज्य आय (NSDP) ÷ कुल जनसंख्या।
मानव विकास सूचकांक (HDI)
स्वास्थ्य, शिक्षा व आय पर आधारित जीवन-गुणवत्ता का सूचकांक (0 से 1)।
आर्थिक समीक्षा
बजट से पूर्व विधानसभा में रखा जाने वाला वार्षिक आर्थिक लेखा-जोखा।
राजकोषीय घाटा
किसी वर्ष में सरकार के कुल व्यय और कुल आय (उधार छोड़कर) का अंतर — कुल उधारी का माप।
प्रचलित बनाम स्थिर मूल्य
प्रचलित = चालू वर्ष की कीमतों पर (महँगाई सहित); स्थिर = आधार वर्ष की कीमतों पर (वास्तविक वृद्धि)।
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