संविधान निर्माण · संविधान सभा व मसौदा समिति · प्रकृति (संघात्मक-एकात्मक, लचीला-कठोर) · प्रस्तावना व 42वाँ संशोधन · विभिन्न देशों से लिए स्रोत — संपूर्ण अध्याय
संसद भवन, नई दिल्ली — संविधान निर्माण व लोकतंत्र का प्रतीकDavid Castor · Public domain · Wikimedia Commons
शुरू करने से पहले
संविधान किसी देश का सर्वोच्च व मूल कानून (Supreme Law) होता है, जिसके अनुसार सरकार चलती है, नागरिकों के अधिकार तय होते हैं और शासन की सीमाएँ बनती हैं। भारतीय संविधान को बनाने वाली 'संविधान सभा' ने 2 वर्ष 11 माह 18 दिन में इसे तैयार किया, जिसे 26 नवंबर 1949 को अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को यह पूरे देश में लागू हुआ। यह विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है। प्रकृति की दृष्टि से यह न पूर्णतः संघात्मक है, न एकात्मक — बल्कि 'अर्ध-संघात्मक' (संघात्मक ढाँचे में एकात्मक झुकाव वाला) है, और संशोधन की दृष्टि से 'न तो बहुत लचीला, न बहुत कठोर'। संविधान की 'प्रस्तावना' (Preamble) इसका सार/आत्मा है जिसे 'संविधान की कुंजी' कहा जाता है। CET में यहाँ से तिथियाँ (26 नवंबर/26 जनवरी), संविधान सभा के अध्यक्ष व सदस्य, मसौदा समिति-अम्बेडकर, प्रस्तावना के शब्द (संप्रभु-समाजवादी-पंथनिरपेक्ष), 42वाँ संशोधन और 'किस देश से क्या लिया' जैसे सीधे व मिलान-प्रश्न आते हैं। नीचे हर भाग को शून्य से समझें और तालिकाओं से दोहराएँ।
1. संविधान क्या है — आधार समझें
संविधान (Constitution) किसी देश का वह मूल व सर्वोच्च लिखित दस्तावेज़ है, जिसके आधार पर सरकार बनती है, चलती है और जिसमें नागरिकों के अधिकार-कर्तव्य तथा शासन के तीनों अंगों (विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका) की शक्तियाँ व सीमाएँ लिखी होती हैं। देश का कोई भी कानून संविधान से ऊपर नहीं हो सकता।
सर्वोच्च कानून — संविधान 'भूमि का सर्वोच्च कानून' (Law of the Land) है; इससे टकराने वाला कोई भी कानून न्यायालय द्वारा रद्द किया जा सकता है।
लिखित बनाम अलिखित — भारत का संविधान 'लिखित' है (एक ग्रंथ में संकलित); ब्रिटेन का संविधान 'अलिखित' (परंपराओं व विभिन्न दस्तावेज़ों पर आधारित) माना जाता है।
सबसे बड़ा लिखित संविधान — भारत का संविधान विश्व का 'सबसे बड़ा/विस्तृत लिखित संविधान' है — मूल रूप में 395 अनुच्छेद, 22 भाग, 8 अनुसूचियाँ थीं।
जीवंत दस्तावेज़ — संविधान को 'जीवंत दस्तावेज़' (Living Document) कहते हैं — समय के साथ संशोधन द्वारा इसमें बदलाव होते रहते हैं।
ध्यान दें — मूल संविधान में 395 अनुच्छेद थे, परंतु संशोधनों के बाद आज इनकी संख्या बढ़कर लगभग 470 (12 अनुसूचियाँ, 25 भाग) हो गई है। फिर भी परीक्षा में 'मूल संविधान' की संख्या (395 अनुच्छेद, 22 भाग, 8 अनुसूचियाँ) अधिक पूछी जाती है।
याद रखें
संविधान = देश का सर्वोच्च व मूल लिखित कानून।
भारत = विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान।
मूल संविधान — 395 अनुच्छेद, 22 भाग, 8 अनुसूचियाँ।
वर्तमान (संशोधनों बाद) — ~470 अनुच्छेद, 25 भाग, 12 अनुसूचियाँ।
2. संविधान सभा — रचना व प्रमुख सदस्य
भारतीय संविधान का निर्माण 'संविधान सभा' (Constituent Assembly) द्वारा हुआ, जिसका गठन 1946 के 'कैबिनेट मिशन योजना' के आधार पर हुआ। संविधान सभा ही वह निकाय थी जिसने पूरे संविधान को बनाया।
प्रथम बैठक — संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई; इसके अस्थायी (अंतरिम) अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा थे।
स्थायी अध्यक्ष — 11 दिसंबर 1946 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद को संविधान सभा का स्थायी अध्यक्ष चुना गया।
संवैधानिक/कानूनी सलाहकार — संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार सर बी. एन. राव (बेनेगल नरसिंह राव) थे, जिन्होंने संविधान का प्रारंभिक प्रारूप तैयार किया।
प्रारूप समिति के अध्यक्ष — मसौदा/प्रारूप समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अम्बेडकर थे — इसीलिए उन्हें 'भारतीय संविधान का जनक/निर्माता' कहा जाता है।
उद्देश्य प्रस्ताव — 13 दिसंबर 1946 को पं. जवाहरलाल नेहरू ने 'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objectives Resolution) प्रस्तुत किया — यही आगे चलकर प्रस्तावना का आधार बना।
संविधान सभा में महिला सदस्य भी थीं (जैसे सरोजिनी नायडू, हंसा मेहता, सुचेता कृपलानी, विजयलक्ष्मी पंडित आदि)। हस्तलिखित मूल संविधान की सुंदर सुलेखनी (कैलीग्राफी) प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने तथा चित्रकारी नंदलाल बोस ने की थी।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर — प्रारूप समिति के अध्यक्ष व 'संविधान के जनक'Unknown authorUnknown author · Public domain · Wikimedia Commons
याद रखें
संविधान सभा का आधार — कैबिनेट मिशन योजना (1946)।
अस्थायी अध्यक्ष — डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा; स्थायी अध्यक्ष — डॉ. राजेंद्र प्रसाद।
संवैधानिक सलाहकार — सर बी. एन. राव।
प्रारूप समिति अध्यक्ष — डॉ. भीमराव अम्बेडकर ('संविधान का जनक')।
3. मसौदा समिति व निर्माण की तिथियाँ
संविधान को व्यवस्थित रूप से लिखने (प्रारूप तैयार करने) का कार्य 'प्रारूप/मसौदा समिति' (Drafting Committee) ने किया, जिसका गठन 29 अगस्त 1947 को हुआ। इसके अध्यक्ष डॉ. भीमराव अम्बेडकर थे और इसमें कुल 7 सदस्य थे।
मसौदा समिति के 7 सदस्य — अध्यक्ष — डॉ. बी. आर. अम्बेडकर; सदस्य — एन. गोपालस्वामी आयंगर, अल्लादी कृष्णस्वामी अय्यर, के. एम. मुंशी, सैयद मोहम्मद सादुल्लाह, एन. माधव राव, टी. टी. कृष्णमाचारी (डी. पी. खेतान के निधन के बाद)।
निर्माण में लगा समय — संविधान बनाने में कुल '2 वर्ष 11 माह 18 दिन' का समय लगा (9 दिसंबर 1946 से 26 नवंबर 1949 तक)।
अंगीकरण/अपनाना — 26 नवंबर 1949 — संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को संविधान को अपनाया (Adopted) व अधिनियमित किया; इसी कारण 26 नवंबर 'संविधान दिवस' (राष्ट्रीय विधि दिवस) मनाया जाता है।
लागू होना — 26 जनवरी 1950 — संविधान 26 जनवरी 1950 को पूरे देश में लागू (Enforced) हुआ; इसी दिन भारत 'गणतंत्र' बना, इसीलिए 26 जनवरी 'गणतंत्र दिवस' है।
26 जनवरी ही क्यों — 26 जनवरी 1930 को कांग्रेस ने 'पूर्ण स्वराज दिवस' मनाया था — उसी ऐतिहासिक तिथि के सम्मान में संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया।
संक्षेप में — संविधान '26 नवंबर 1949 को अपनाया' गया परंतु '26 जनवरी 1950 को लागू' हुआ। संविधान सभा की कुल 11 बैठकें/सत्र हुए और इस पर अंतिम रूप से 284 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए। संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को राष्ट्रगान (जन गण मन) व राष्ट्रगीत (वंदे मातरम्) को अपनाया; राष्ट्रीय ध्वज इससे पहले 22 जुलाई 1947 को अपनाया जा चुका था।
याद रखें
मसौदा समिति का गठन — 29 अगस्त 1947; अध्यक्ष अम्बेडकर; कुल 7 सदस्य।
निर्माण-काल — 2 वर्ष 11 माह 18 दिन।
26 नवंबर 1949 — अपनाया (संविधान दिवस)।
26 जनवरी 1950 — लागू हुआ (गणतंत्र दिवस)।
4. संविधान की प्रकृति — संघात्मक बनाम एकात्मक
भारतीय संविधान की 'प्रकृति' (Nature) पर प्रश्न आते हैं कि यह संघात्मक (Federal) है या एकात्मक (Unitary)। वास्तव में भारतीय संविधान दोनों के गुण लिए हुए है, इसीलिए इसे 'अर्ध-संघात्मक' या 'सहयोगी संघवाद' वाला माना जाता है।
संघात्मक लक्षण — लिखित व कठोर संविधान, केंद्र व राज्यों में शक्ति-विभाजन (तीन सूचियाँ), द्विसदनीय संसद, स्वतंत्र न्यायपालिका, संविधान की सर्वोच्चता।
एकात्मक लक्षण — एकल नागरिकता, एकल संविधान, शक्तिशाली केंद्र, अखिल भारतीय सेवाएँ (IAS/IPS), आपातकाल में केंद्र का बढ़ता नियंत्रण, राज्यपाल की केंद्र-नियुक्ति, इकहरी न्याय-व्यवस्था।
'राज्यों का संघ' — अनुच्छेद-1 में भारत को 'राज्यों का संघ' (Union of States) कहा गया है — 'फेडरेशन' शब्द जानबूझकर नहीं रखा गया, ताकि राज्यों को अलग होने का अधिकार न हो।
अर्ध-संघात्मक — के. सी. व्हीयर ने भारतीय संविधान को 'अर्ध-संघात्मक' (Quasi-Federal) कहा — अर्थात् संघात्मक ढाँचे में एकात्मक झुकाव।
सार यह कि — 'सामान्य समय में संघात्मक, आपातकाल में एकात्मक' बन जाने वाला हमारा संविधान है। इसीलिए इसे 'मज़बूत केंद्र वाला संघ' कहा जाता है।
याद रखें
भारतीय संविधान = अर्ध-संघात्मक (संघ + एकात्मक दोनों गुण)।
अनुच्छेद-1 — भारत 'राज्यों का संघ' (Union of States)।
संघात्मक — शक्ति-विभाजन, लिखित-कठोर, स्वतंत्र न्यायपालिका।
संशोधन (Amendment) की प्रक्रिया के आधार पर संविधान या तो 'लचीला' (Flexible — आसानी से बदले) या 'कठोर' (Rigid — कठिन प्रक्रिया) होता है। भारतीय संविधान इन दोनों का मिश्रण है — 'न तो बहुत लचीला, न बहुत कठोर'।
संशोधन की शक्ति — संविधान संशोधन का प्रावधान अनुच्छेद-368 में है; संशोधन तीन प्रकार से होते हैं।
1. साधारण बहुमत (लचीला भाग) — कुछ प्रावधान संसद के 'साधारण बहुमत' से बदले जा सकते हैं (जैसे नए राज्य का गठन) — यह लचीलापन है।
2. विशेष बहुमत (कठोर भाग) — अधिकांश संशोधन संसद के 'विशेष बहुमत' (दो-तिहाई उपस्थित व मतदान करने वाले तथा कुल सदस्यों के बहुमत) से होते हैं।
3. विशेष बहुमत + राज्यों की सहमति (सर्वाधिक कठोर) — संघीय ढाँचे से जुड़े प्रावधानों के लिए विशेष बहुमत के साथ कम-से-कम आधे राज्यों के विधानमंडलों की सहमति भी चाहिए।
इस प्रकार भारतीय संविधान संशोधन की दृष्टि से बीच का रास्ता अपनाता है — कुछ भाग आसानी से, कुछ कठिनाई से बदले जाते हैं। यही कारण है कि इसे 'लचीला व कठोर का सुंदर मिश्रण' कहा जाता है। मूल अधिकार व मूल कर्तव्य भी संशोधन से प्रभावित हो सकते हैं, परंतु संविधान का 'मूल ढाँचा' (Basic Structure) नहीं बदला जा सकता (केशवानंद भारती वाद, 1973)।
याद रखें
संविधान = लचीला + कठोर का मिश्रण ('न बहुत लचीला, न बहुत कठोर')।
संशोधन का प्रावधान — अनुच्छेद-368।
तीन प्रकार — साधारण बहुमत · विशेष बहुमत · विशेष बहुमत + राज्यों की सहमति।
'मूल ढाँचा' नहीं बदला जा सकता — केशवानंद भारती वाद (1973)।
6. प्रस्तावना — संविधान की आत्मा व कुंजी
प्रस्तावना (Preamble) संविधान का परिचयात्मक/प्रारंभिक कथन है, जो बताती है कि संविधान का स्रोत, उद्देश्य व आदर्श क्या हैं। इसे 'संविधान की आत्मा', 'संविधान की कुंजी' तथा 'संविधान की पहचान-पत्र' कहा जाता है। यह नेहरू के 'उद्देश्य प्रस्ताव' पर आधारित है।
शक्ति का स्रोत — 'हम भारत के लोग' — प्रस्तावना का आरंभ 'हम भारत के लोग' (We, the People of India) से होता है — अर्थात् संविधान की सर्वोच्च शक्ति का स्रोत जनता है (लोकप्रिय संप्रभुता)।
चार मूल शब्द (राज्य का स्वरूप) — भारत को 'संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष (धर्मनिरपेक्ष), लोकतांत्रिक गणराज्य' घोषित किया गया है — ये चार/पाँच विशेषण राज्य के स्वरूप को बताते हैं।
चार उद्देश्य (आदर्श) — प्रस्तावना नागरिकों के लिए चार लक्ष्य देती है — न्याय (सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक), स्वतंत्रता, समानता और बंधुता (भाईचारा)।
तिथि का उल्लेख — प्रस्तावना के अंत में '26 नवंबर 1949' तिथि अंकित है, जिस दिन संविधान को अपनाया गया।
'संविधान की कुंजी' — के. एम. मुंशी ने प्रस्तावना को 'संविधान की कुंडली/जन्म-पत्री' तथा एन. ए. पालकीवाला ने 'संविधान का पहचान-पत्र' कहा; इसे 'संविधान की कुंजी' (Key to the Constitution) भी कहते हैं।
बेरुबारी संघ वाद (1960) में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि प्रस्तावना संविधान का भाग नहीं है, परंतु केशवानंद भारती वाद (1973) में यह माना गया कि 'प्रस्तावना संविधान का अभिन्न भाग है' तथा इसे अनुच्छेद-368 के अंतर्गत संशोधित किया जा सकता है।
याद रखें
प्रस्तावना = 'संविधान की आत्मा/कुंजी/पहचान-पत्र'।
आरंभ — 'हम भारत के लोग' (शक्ति का स्रोत = जनता)।
चार उद्देश्य — न्याय, स्वतंत्रता, समानता, बंधुता।
प्रस्तावना संविधान का भाग है — केशवानंद भारती वाद (1973)।
7. 42वाँ संशोधन व प्रस्तावना के शब्द
मूल प्रस्तावना में 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्द नहीं थे। इन्हें 1976 के '42वें संविधान संशोधन' द्वारा जोड़ा गया, जिसे 'मिनी संविधान' भी कहा जाता है।
42वाँ संशोधन (1976) — इंदिरा गांधी सरकार के समय 42वें संशोधन (1976) द्वारा प्रस्तावना में तीन शब्द जोड़े गए — 'समाजवादी' (Socialist), 'पंथनिरपेक्ष' (Secular) तथा 'अखंडता' (Integrity)।
बदला हुआ वर्णन — संशोधन से पहले — 'संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य'; संशोधन के बाद — 'संप्रभु समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य'।
'मिनी संविधान' — 42वाँ संशोधन इतने व्यापक बदलाव लाया (मूल कर्तव्य जोड़े, प्रस्तावना बदली) कि इसे 'लघु/मिनी संविधान' (Mini Constitution) कहा जाता है।
अब तक एकमात्र प्रस्तावना-संशोधन — प्रस्तावना में आज तक केवल एक बार (42वें संशोधन, 1976 में) ही बदलाव हुआ है।
स्वराज पार्टी/सरदार स्वर्ण सिंह समिति — 42वें संशोधन की सिफ़ारिशें 'सरदार स्वर्ण सिंह समिति' ने दी थीं; इसी से मूल कर्तव्य (अनुच्छेद-51क) भी जोड़े गए।
ध्यान रखें — 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' व 'अखंडता' तीन शब्द 1976 में जुड़े; प्रस्तावना में अब तक केवल यही एक संशोधन हुआ है। 'पंथनिरपेक्ष' का अर्थ है — राज्य का अपना कोई धर्म नहीं, सभी धर्म समान।
याद रखें
42वाँ संशोधन (1976) = 'मिनी संविधान'; इंदिरा गांधी काल।
जोड़े गए तीन शब्द — समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, अखंडता।
सिफ़ारिश — सरदार स्वर्ण सिंह समिति।
प्रस्तावना में आज तक केवल यही एक बार संशोधन हुआ।
8. विभिन्न देशों से लिए गए स्रोत
भारतीय संविधान को 'उधार का थैला' (Bag of Borrowings) भी कहा जाता है, क्योंकि इसके अनेक प्रावधान विभिन्न देशों के संविधानों से लिए गए हैं। सबसे अधिक उपबंध 'भारत सरकार अधिनियम, 1935' से लिए गए हैं।
भारत सरकार अधिनियम 1935 — संघीय व्यवस्था, राज्यपाल का पद, न्यायपालिका, लोक सेवा आयोग, आपातकालीन प्रावधान — सर्वाधिक उपबंध इसी से लिए गए (संविधान का ढाँचा/कंकाल)।
ब्रिटेन (इंग्लैंड) — संसदीय शासन प्रणाली, विधि का शासन, एकल नागरिकता, संसदीय विशेषाधिकार, मंत्रिमंडल व्यवस्था, द्विसदनीय संसद।
अमेरिका (USA) — मौलिक/मूल अधिकार, न्यायिक पुनरावलोकन, स्वतंत्र न्यायपालिका, राष्ट्रपति पर महाभियोग, उपराष्ट्रपति, संविधान की सर्वोच्चता, प्रस्तावना की धारणा।
आयरलैंड — नीति-निदेशक तत्व, राष्ट्रपति के निर्वाचन की पद्धति, राज्यसभा में सदस्यों का मनोनयन।
रूस (पूर्व सोवियत संघ) — मूल कर्तव्य (Fundamental Duties) तथा प्रस्तावना में 'न्याय (सामाजिक-आर्थिक-राजनैतिक)' का आदर्श।
अन्य देश — कनाडा — मज़बूत केंद्र वाली संघ व्यवस्था व अवशिष्ट शक्तियाँ; जर्मनी (वाइमर) — आपातकाल में मूल अधिकारों का निलंबन; द. अफ्रीका — संविधान संशोधन प्रक्रिया व राज्यसभा सदस्यों का चुनाव; ऑस्ट्रेलिया — समवर्ती सूची, व्यापार-वाणिज्य की स्वतंत्रता, संसद के संयुक्त अधिवेशन; फ्रांस — गणतंत्र व प्रस्तावना के 'स्वतंत्रता-समानता-बंधुता' आदर्श।
संक्षेप में याद रखें — मूल अधिकार (अमेरिका), नीति-निदेशक तत्व (आयरलैंड), मूल कर्तव्य (रूस), संसदीय व्यवस्था (ब्रिटेन), आपातकाल (जर्मनी), संघ व्यवस्था (कनाडा), समवर्ती सूची (ऑस्ट्रेलिया), स्वतंत्रता-समानता-बंधुता (फ्रांस)।
याद रखें
सर्वाधिक उपबंध — भारत सरकार अधिनियम, 1935।
मूल अधिकार व न्यायिक पुनरावलोकन — अमेरिका।
नीति-निदेशक तत्व — आयरलैंड; मूल कर्तव्य — रूस।
संसदीय प्रणाली — ब्रिटेन; आपातकाल — जर्मनी; संघ व्यवस्था — कनाडा।
भारतीय संविधान — झलकियाँ
भारत की संविधान सभा का अधिवेशन — संविधान निर्माणUnknown authorUnknown author · Public domain · Wikimedia Commonsडॉ. राजेंद्र प्रसाद — संविधान सभा के स्थायी अध्यक्षWhite House · Public domain · Wikimedia Commons
परीक्षा-उपयोगी तालिकाएँ
संविधान निर्माण — प्रमुख तिथियाँ
घटना
तिथि
संविधान सभा की पहली बैठक
9 दिसंबर 1946
उद्देश्य प्रस्ताव (नेहरू)
13 दिसंबर 1946
प्रारूप/मसौदा समिति का गठन
29 अगस्त 1947
संविधान अपनाया गया
26 नवंबर 1949
संविधान लागू हुआ
26 जनवरी 1950
निर्माण में लगा कुल समय
2 वर्ष 11 माह 18 दिन
संविधान सभा — प्रमुख व्यक्ति व पद
पद/भूमिका
व्यक्ति
अस्थायी (अंतरिम) अध्यक्ष
डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा
स्थायी अध्यक्ष
डॉ. राजेंद्र प्रसाद
प्रारूप/मसौदा समिति अध्यक्ष
डॉ. भीमराव अम्बेडकर
संवैधानिक/कानूनी सलाहकार
सर बी. एन. राव
सुलेखनी (कैलीग्राफी)
प्रेम बिहारी नारायण रायजादा
चित्रकारी/सज्जा
नंदलाल बोस
प्रकृति — संघात्मक बनाम एकात्मक लक्षण
संघात्मक लक्षण
एकात्मक लक्षण
लिखित व कठोर संविधान
एकल नागरिकता व एकल संविधान
केंद्र-राज्य शक्ति विभाजन
शक्तिशाली केंद्र
द्विसदनीय संसद
अखिल भारतीय सेवाएँ (IAS/IPS)
स्वतंत्र न्यायपालिका
आपातकालीन प्रावधान
संविधान की सर्वोच्चता
राज्यपाल की केंद्र द्वारा नियुक्ति
प्रस्तावना — शब्द व उनका अर्थ
शब्द
अर्थ/भाव
संप्रभु (Sovereign)
भारत किसी बाहरी शक्ति के अधीन नहीं, पूर्ण स्वतंत्र।
समाजवादी (Socialist)
धन व संसाधनों का समान वितरण (42वें संशोधन में जोड़ा)।
पंथनिरपेक्ष (Secular)
राज्य का अपना कोई धर्म नहीं, सभी धर्म समान (42वें संशोधन में)।
लोकतांत्रिक (Democratic)
जनता द्वारा चुनी सरकार; शक्ति का स्रोत जनता।
गणराज्य (Republic)
राष्ट्राध्यक्ष (राष्ट्रपति) निर्वाचित होता है, वंशानुगत नहीं।
42वाँ संशोधन — प्रस्तावना में जुड़े शब्द
जोड़ा गया शब्द
वर्ष/विवरण
समाजवादी (Socialist)
1976 (42वाँ संशोधन)
पंथनिरपेक्ष (Secular)
1976 (42वाँ संशोधन)
अखंडता (Integrity)
1976 (42वाँ संशोधन)
सिफ़ारिश समिति
सरदार स्वर्ण सिंह समिति
उपनाम
'मिनी संविधान'
विभिन्न देशों से लिए गए स्रोत
स्रोत देश/अधिनियम
लिया गया प्रावधान
भारत सरकार अधिनियम 1935
संघीय ढाँचा, राज्यपाल, आपातकाल (सर्वाधिक)
ब्रिटेन
संसदीय प्रणाली, एकल नागरिकता, विधि का शासन
अमेरिका
मूल अधिकार, न्यायिक पुनरावलोकन, महाभियोग
आयरलैंड
नीति-निदेशक तत्व, राष्ट्रपति निर्वाचन
रूस (सोवियत संघ)
मूल कर्तव्य, सामाजिक-आर्थिक न्याय
कनाडा
मज़बूत केंद्र, अवशिष्ट शक्तियाँ
ऑस्ट्रेलिया
समवर्ती सूची, संयुक्त अधिवेशन
जर्मनी (वाइमर)
आपातकाल में मूल अधिकारों का निलंबन
फ्रांस
गणतंत्र; स्वतंत्रता-समानता-बंधुता
शब्दावली — अंग्रेज़ी पद का अर्थ
संविधान (Constitution)
देश का सर्वोच्च व मूल लिखित कानून, जिसके अनुसार शासन चलता है।
संविधान सभा (Constituent Assembly)
वह निकाय जिसने भारतीय संविधान का निर्माण किया (पहली बैठक 9 दिसंबर 1946)।
मसौदा/प्रारूप समिति (Drafting Committee)
संविधान का प्रारूप तैयार करने वाली 7-सदस्यीय समिति; अध्यक्ष — डॉ. अम्बेडकर।
प्रस्तावना (Preamble)
संविधान का परिचयात्मक कथन; इसे 'संविधान की आत्मा/कुंजी' कहते हैं।
संप्रभु (Sovereign)
किसी बाहरी शक्ति के अधीन न होना; पूर्ण स्वतंत्र राष्ट्र।
समाजवादी (Socialist)
संसाधनों के समान वितरण व सामाजिक-आर्थिक समानता का आदर्श।
पंथनिरपेक्ष (Secular)
राज्य का अपना कोई धर्म नहीं; सभी धर्मों को समान आदर।
गणराज्य (Republic)
जहाँ राष्ट्राध्यक्ष (राष्ट्रपति) निर्वाचित हो, वंशानुगत राजा न हो।
संघात्मक (Federal)
केंद्र व राज्यों में शक्ति-विभाजन वाली शासन व्यवस्था।
एकात्मक (Unitary)
सारी शक्ति केंद्र में केंद्रित होने वाली व्यवस्था।
अर्ध-संघात्मक (Quasi-Federal)
संघ व एकात्मक दोनों गुणों वाला संविधान (के. सी. व्हीयर का कथन)।
42वाँ संशोधन (1976)
'मिनी संविधान'; प्रस्तावना में समाजवादी-पंथनिरपेक्ष-अखंडता जोड़े गए।
वास्तविक RPSC CET प्रश्न · सामग्री हस्तलिखित व सत्यापित