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भारतीय संविधान — प्रकृति व प्रस्तावना

संविधान निर्माण · संविधान सभा व मसौदा समिति · प्रकृति (संघात्मक-एकात्मक, लचीला-कठोर) · प्रस्तावना व 42वाँ संशोधन · विभिन्न देशों से लिए स्रोत — संपूर्ण अध्याय
संसद भवन, नई दिल्ली — संविधान निर्माण व लोकतंत्र का प्रतीक
संसद भवन, नई दिल्ली — संविधान निर्माण व लोकतंत्र का प्रतीक
David Castor · Public domain · Wikimedia Commons

शुरू करने से पहले

संविधान किसी देश का सर्वोच्च व मूल कानून (Supreme Law) होता है, जिसके अनुसार सरकार चलती है, नागरिकों के अधिकार तय होते हैं और शासन की सीमाएँ बनती हैं। भारतीय संविधान को बनाने वाली 'संविधान सभा' ने 2 वर्ष 11 माह 18 दिन में इसे तैयार किया, जिसे 26 नवंबर 1949 को अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को यह पूरे देश में लागू हुआ। यह विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है। प्रकृति की दृष्टि से यह न पूर्णतः संघात्मक है, न एकात्मक — बल्कि 'अर्ध-संघात्मक' (संघात्मक ढाँचे में एकात्मक झुकाव वाला) है, और संशोधन की दृष्टि से 'न तो बहुत लचीला, न बहुत कठोर'। संविधान की 'प्रस्तावना' (Preamble) इसका सार/आत्मा है जिसे 'संविधान की कुंजी' कहा जाता है। CET में यहाँ से तिथियाँ (26 नवंबर/26 जनवरी), संविधान सभा के अध्यक्ष व सदस्य, मसौदा समिति-अम्बेडकर, प्रस्तावना के शब्द (संप्रभु-समाजवादी-पंथनिरपेक्ष), 42वाँ संशोधन और 'किस देश से क्या लिया' जैसे सीधे व मिलान-प्रश्न आते हैं। नीचे हर भाग को शून्य से समझें और तालिकाओं से दोहराएँ।

1. संविधान क्या है — आधार समझें

संविधान (Constitution) किसी देश का वह मूल व सर्वोच्च लिखित दस्तावेज़ है, जिसके आधार पर सरकार बनती है, चलती है और जिसमें नागरिकों के अधिकार-कर्तव्य तथा शासन के तीनों अंगों (विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका) की शक्तियाँ व सीमाएँ लिखी होती हैं। देश का कोई भी कानून संविधान से ऊपर नहीं हो सकता।

ध्यान दें — मूल संविधान में 395 अनुच्छेद थे, परंतु संशोधनों के बाद आज इनकी संख्या बढ़कर लगभग 470 (12 अनुसूचियाँ, 25 भाग) हो गई है। फिर भी परीक्षा में 'मूल संविधान' की संख्या (395 अनुच्छेद, 22 भाग, 8 अनुसूचियाँ) अधिक पूछी जाती है।

याद रखें
  • संविधान = देश का सर्वोच्च व मूल लिखित कानून।
  • भारत = विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान।
  • मूल संविधान — 395 अनुच्छेद, 22 भाग, 8 अनुसूचियाँ।
  • वर्तमान (संशोधनों बाद) — ~470 अनुच्छेद, 25 भाग, 12 अनुसूचियाँ।

2. संविधान सभा — रचना व प्रमुख सदस्य

भारतीय संविधान का निर्माण 'संविधान सभा' (Constituent Assembly) द्वारा हुआ, जिसका गठन 1946 के 'कैबिनेट मिशन योजना' के आधार पर हुआ। संविधान सभा ही वह निकाय थी जिसने पूरे संविधान को बनाया।

संविधान सभा में महिला सदस्य भी थीं (जैसे सरोजिनी नायडू, हंसा मेहता, सुचेता कृपलानी, विजयलक्ष्मी पंडित आदि)। हस्तलिखित मूल संविधान की सुंदर सुलेखनी (कैलीग्राफी) प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने तथा चित्रकारी नंदलाल बोस ने की थी।

डॉ. भीमराव अम्बेडकर — प्रारूप समिति के अध्यक्ष व 'संविधान के जनक'
डॉ. भीमराव अम्बेडकर — प्रारूप समिति के अध्यक्ष व 'संविधान के जनक'
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याद रखें
  • संविधान सभा का आधार — कैबिनेट मिशन योजना (1946)।
  • अस्थायी अध्यक्ष — डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा; स्थायी अध्यक्ष — डॉ. राजेंद्र प्रसाद।
  • संवैधानिक सलाहकार — सर बी. एन. राव।
  • प्रारूप समिति अध्यक्ष — डॉ. भीमराव अम्बेडकर ('संविधान का जनक')।

3. मसौदा समिति व निर्माण की तिथियाँ

संविधान को व्यवस्थित रूप से लिखने (प्रारूप तैयार करने) का कार्य 'प्रारूप/मसौदा समिति' (Drafting Committee) ने किया, जिसका गठन 29 अगस्त 1947 को हुआ। इसके अध्यक्ष डॉ. भीमराव अम्बेडकर थे और इसमें कुल 7 सदस्य थे।

संक्षेप में — संविधान '26 नवंबर 1949 को अपनाया' गया परंतु '26 जनवरी 1950 को लागू' हुआ। संविधान सभा की कुल 11 बैठकें/सत्र हुए और इस पर अंतिम रूप से 284 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए। संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को राष्ट्रगान (जन गण मन) व राष्ट्रगीत (वंदे मातरम्) को अपनाया; राष्ट्रीय ध्वज इससे पहले 22 जुलाई 1947 को अपनाया जा चुका था।

याद रखें
  • मसौदा समिति का गठन — 29 अगस्त 1947; अध्यक्ष अम्बेडकर; कुल 7 सदस्य।
  • निर्माण-काल — 2 वर्ष 11 माह 18 दिन।
  • 26 नवंबर 1949 — अपनाया (संविधान दिवस)।
  • 26 जनवरी 1950 — लागू हुआ (गणतंत्र दिवस)।

4. संविधान की प्रकृति — संघात्मक बनाम एकात्मक

भारतीय संविधान की 'प्रकृति' (Nature) पर प्रश्न आते हैं कि यह संघात्मक (Federal) है या एकात्मक (Unitary)। वास्तव में भारतीय संविधान दोनों के गुण लिए हुए है, इसीलिए इसे 'अर्ध-संघात्मक' या 'सहयोगी संघवाद' वाला माना जाता है।

सार यह कि — 'सामान्य समय में संघात्मक, आपातकाल में एकात्मक' बन जाने वाला हमारा संविधान है। इसीलिए इसे 'मज़बूत केंद्र वाला संघ' कहा जाता है।

याद रखें
  • भारतीय संविधान = अर्ध-संघात्मक (संघ + एकात्मक दोनों गुण)।
  • अनुच्छेद-1 — भारत 'राज्यों का संघ' (Union of States)।
  • संघात्मक — शक्ति-विभाजन, लिखित-कठोर, स्वतंत्र न्यायपालिका।
  • एकात्मक — एकल नागरिकता, शक्तिशाली केंद्र, आपातकालीन शक्तियाँ।

5. संविधान की प्रकृति — लचीला बनाम कठोर

संशोधन (Amendment) की प्रक्रिया के आधार पर संविधान या तो 'लचीला' (Flexible — आसानी से बदले) या 'कठोर' (Rigid — कठिन प्रक्रिया) होता है। भारतीय संविधान इन दोनों का मिश्रण है — 'न तो बहुत लचीला, न बहुत कठोर'।

इस प्रकार भारतीय संविधान संशोधन की दृष्टि से बीच का रास्ता अपनाता है — कुछ भाग आसानी से, कुछ कठिनाई से बदले जाते हैं। यही कारण है कि इसे 'लचीला व कठोर का सुंदर मिश्रण' कहा जाता है। मूल अधिकार व मूल कर्तव्य भी संशोधन से प्रभावित हो सकते हैं, परंतु संविधान का 'मूल ढाँचा' (Basic Structure) नहीं बदला जा सकता (केशवानंद भारती वाद, 1973)।

याद रखें
  • संविधान = लचीला + कठोर का मिश्रण ('न बहुत लचीला, न बहुत कठोर')।
  • संशोधन का प्रावधान — अनुच्छेद-368।
  • तीन प्रकार — साधारण बहुमत · विशेष बहुमत · विशेष बहुमत + राज्यों की सहमति।
  • 'मूल ढाँचा' नहीं बदला जा सकता — केशवानंद भारती वाद (1973)।

6. प्रस्तावना — संविधान की आत्मा व कुंजी

प्रस्तावना (Preamble) संविधान का परिचयात्मक/प्रारंभिक कथन है, जो बताती है कि संविधान का स्रोत, उद्देश्य व आदर्श क्या हैं। इसे 'संविधान की आत्मा', 'संविधान की कुंजी' तथा 'संविधान की पहचान-पत्र' कहा जाता है। यह नेहरू के 'उद्देश्य प्रस्ताव' पर आधारित है।

बेरुबारी संघ वाद (1960) में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि प्रस्तावना संविधान का भाग नहीं है, परंतु केशवानंद भारती वाद (1973) में यह माना गया कि 'प्रस्तावना संविधान का अभिन्न भाग है' तथा इसे अनुच्छेद-368 के अंतर्गत संशोधित किया जा सकता है।

याद रखें
  • प्रस्तावना = 'संविधान की आत्मा/कुंजी/पहचान-पत्र'।
  • आरंभ — 'हम भारत के लोग' (शक्ति का स्रोत = जनता)।
  • चार उद्देश्य — न्याय, स्वतंत्रता, समानता, बंधुता।
  • प्रस्तावना संविधान का भाग है — केशवानंद भारती वाद (1973)।

7. 42वाँ संशोधन व प्रस्तावना के शब्द

मूल प्रस्तावना में 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्द नहीं थे। इन्हें 1976 के '42वें संविधान संशोधन' द्वारा जोड़ा गया, जिसे 'मिनी संविधान' भी कहा जाता है।

ध्यान रखें — 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' व 'अखंडता' तीन शब्द 1976 में जुड़े; प्रस्तावना में अब तक केवल यही एक संशोधन हुआ है। 'पंथनिरपेक्ष' का अर्थ है — राज्य का अपना कोई धर्म नहीं, सभी धर्म समान।

याद रखें
  • 42वाँ संशोधन (1976) = 'मिनी संविधान'; इंदिरा गांधी काल।
  • जोड़े गए तीन शब्द — समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, अखंडता।
  • सिफ़ारिश — सरदार स्वर्ण सिंह समिति।
  • प्रस्तावना में आज तक केवल यही एक बार संशोधन हुआ।

8. विभिन्न देशों से लिए गए स्रोत

भारतीय संविधान को 'उधार का थैला' (Bag of Borrowings) भी कहा जाता है, क्योंकि इसके अनेक प्रावधान विभिन्न देशों के संविधानों से लिए गए हैं। सबसे अधिक उपबंध 'भारत सरकार अधिनियम, 1935' से लिए गए हैं।

संक्षेप में याद रखें — मूल अधिकार (अमेरिका), नीति-निदेशक तत्व (आयरलैंड), मूल कर्तव्य (रूस), संसदीय व्यवस्था (ब्रिटेन), आपातकाल (जर्मनी), संघ व्यवस्था (कनाडा), समवर्ती सूची (ऑस्ट्रेलिया), स्वतंत्रता-समानता-बंधुता (फ्रांस)।

याद रखें
  • सर्वाधिक उपबंध — भारत सरकार अधिनियम, 1935।
  • मूल अधिकार व न्यायिक पुनरावलोकन — अमेरिका।
  • नीति-निदेशक तत्व — आयरलैंड; मूल कर्तव्य — रूस।
  • संसदीय प्रणाली — ब्रिटेन; आपातकाल — जर्मनी; संघ व्यवस्था — कनाडा।

भारतीय संविधान — झलकियाँ

परीक्षा-उपयोगी तालिकाएँ

संविधान निर्माण — प्रमुख तिथियाँ

घटनातिथि
संविधान सभा की पहली बैठक9 दिसंबर 1946
उद्देश्य प्रस्ताव (नेहरू)13 दिसंबर 1946
प्रारूप/मसौदा समिति का गठन29 अगस्त 1947
संविधान अपनाया गया26 नवंबर 1949
संविधान लागू हुआ26 जनवरी 1950
निर्माण में लगा कुल समय2 वर्ष 11 माह 18 दिन

संविधान सभा — प्रमुख व्यक्ति व पद

पद/भूमिकाव्यक्ति
अस्थायी (अंतरिम) अध्यक्षडॉ. सच्चिदानंद सिन्हा
स्थायी अध्यक्षडॉ. राजेंद्र प्रसाद
प्रारूप/मसौदा समिति अध्यक्षडॉ. भीमराव अम्बेडकर
संवैधानिक/कानूनी सलाहकारसर बी. एन. राव
सुलेखनी (कैलीग्राफी)प्रेम बिहारी नारायण रायजादा
चित्रकारी/सज्जानंदलाल बोस

प्रकृति — संघात्मक बनाम एकात्मक लक्षण

संघात्मक लक्षणएकात्मक लक्षण
लिखित व कठोर संविधानएकल नागरिकता व एकल संविधान
केंद्र-राज्य शक्ति विभाजनशक्तिशाली केंद्र
द्विसदनीय संसदअखिल भारतीय सेवाएँ (IAS/IPS)
स्वतंत्र न्यायपालिकाआपातकालीन प्रावधान
संविधान की सर्वोच्चताराज्यपाल की केंद्र द्वारा नियुक्ति

प्रस्तावना — शब्द व उनका अर्थ

शब्दअर्थ/भाव
संप्रभु (Sovereign)भारत किसी बाहरी शक्ति के अधीन नहीं, पूर्ण स्वतंत्र।
समाजवादी (Socialist)धन व संसाधनों का समान वितरण (42वें संशोधन में जोड़ा)।
पंथनिरपेक्ष (Secular)राज्य का अपना कोई धर्म नहीं, सभी धर्म समान (42वें संशोधन में)।
लोकतांत्रिक (Democratic)जनता द्वारा चुनी सरकार; शक्ति का स्रोत जनता।
गणराज्य (Republic)राष्ट्राध्यक्ष (राष्ट्रपति) निर्वाचित होता है, वंशानुगत नहीं।

42वाँ संशोधन — प्रस्तावना में जुड़े शब्द

जोड़ा गया शब्दवर्ष/विवरण
समाजवादी (Socialist)1976 (42वाँ संशोधन)
पंथनिरपेक्ष (Secular)1976 (42वाँ संशोधन)
अखंडता (Integrity)1976 (42वाँ संशोधन)
सिफ़ारिश समितिसरदार स्वर्ण सिंह समिति
उपनाम'मिनी संविधान'

विभिन्न देशों से लिए गए स्रोत

स्रोत देश/अधिनियमलिया गया प्रावधान
भारत सरकार अधिनियम 1935संघीय ढाँचा, राज्यपाल, आपातकाल (सर्वाधिक)
ब्रिटेनसंसदीय प्रणाली, एकल नागरिकता, विधि का शासन
अमेरिकामूल अधिकार, न्यायिक पुनरावलोकन, महाभियोग
आयरलैंडनीति-निदेशक तत्व, राष्ट्रपति निर्वाचन
रूस (सोवियत संघ)मूल कर्तव्य, सामाजिक-आर्थिक न्याय
कनाडामज़बूत केंद्र, अवशिष्ट शक्तियाँ
ऑस्ट्रेलियासमवर्ती सूची, संयुक्त अधिवेशन
जर्मनी (वाइमर)आपातकाल में मूल अधिकारों का निलंबन
फ्रांसगणतंत्र; स्वतंत्रता-समानता-बंधुता

शब्दावली — अंग्रेज़ी पद का अर्थ

संविधान (Constitution)
देश का सर्वोच्च व मूल लिखित कानून, जिसके अनुसार शासन चलता है।
संविधान सभा (Constituent Assembly)
वह निकाय जिसने भारतीय संविधान का निर्माण किया (पहली बैठक 9 दिसंबर 1946)।
मसौदा/प्रारूप समिति (Drafting Committee)
संविधान का प्रारूप तैयार करने वाली 7-सदस्यीय समिति; अध्यक्ष — डॉ. अम्बेडकर।
प्रस्तावना (Preamble)
संविधान का परिचयात्मक कथन; इसे 'संविधान की आत्मा/कुंजी' कहते हैं।
संप्रभु (Sovereign)
किसी बाहरी शक्ति के अधीन न होना; पूर्ण स्वतंत्र राष्ट्र।
समाजवादी (Socialist)
संसाधनों के समान वितरण व सामाजिक-आर्थिक समानता का आदर्श।
पंथनिरपेक्ष (Secular)
राज्य का अपना कोई धर्म नहीं; सभी धर्मों को समान आदर।
गणराज्य (Republic)
जहाँ राष्ट्राध्यक्ष (राष्ट्रपति) निर्वाचित हो, वंशानुगत राजा न हो।
संघात्मक (Federal)
केंद्र व राज्यों में शक्ति-विभाजन वाली शासन व्यवस्था।
एकात्मक (Unitary)
सारी शक्ति केंद्र में केंद्रित होने वाली व्यवस्था।
अर्ध-संघात्मक (Quasi-Federal)
संघ व एकात्मक दोनों गुणों वाला संविधान (के. सी. व्हीयर का कथन)।
42वाँ संशोधन (1976)
'मिनी संविधान'; प्रस्तावना में समाजवादी-पंथनिरपेक्ष-अखंडता जोड़े गए।
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