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प्राथमिक चिकित्सा व CPR

प्राथमिक चिकित्सा के सिद्धांत (ABC) · रक्तस्राव-जलना-अस्थिभंग-बेहोशी-दम घुटना-साँप काटना-हृदयाघात · CPR व मुख-से-मुख श्वसन · घाव/पट्टी · आपातकालीन नंबर (108/102) · करें-न करें — संपूर्ण अध्याय
CPR (हृत्फुफ्फुसीय पुनरुज्जीवन) — साँस/धड़कन रुकने पर जीवन-रक्षक प्राथमिक चिकित्सा
CPR (हृत्फुफ्फुसीय पुनरुज्जीवन) — साँस/धड़कन रुकने पर जीवन-रक्षक प्राथमिक चिकित्सा
Capt. Balinda ONeal, U.S. Army · Public domain · Wikimedia Commons

शुरू करने से पहले

प्राथमिक चिकित्सा (First Aid) का अर्थ है — किसी घायल या अचानक बीमार व्यक्ति को, डॉक्टर के पास पहुँचने से पहले, तुरंत दी जाने वाली प्रारंभिक व अस्थायी सहायता। इसका लक्ष्य तीन बातें हैं — जान बचाना, हालत बिगड़ने से रोकना, और रोगी को आराम पहुँचाना (अंग्रेज़ी में '3P' — Preserve life, Prevent worsening, Promote recovery)। प्राथमिक चिकित्सा करने वाला 'फर्स्ट एडर' डॉक्टर नहीं होता, इसलिए उसका काम केवल जीवन-रक्षक प्राथमिक कदम उठाना है, इलाज नहीं। यह अध्याय जन स्वास्थ्य का अत्यंत व्यावहारिक व जीवनोपयोगी भाग है। राजस्थान CET में यहाँ से ABC का क्रम, साँप काटने व जलने पर 'क्या करें-क्या न करें', CPR में छाती दबाने की गति (100-120/मिनट) व अनुपात (30:2), तथा आपातकालीन नंबर (108 एम्बुलेंस, 102 जननी-शिशु) जैसे सीधे तथ्यात्मक व मिलान-प्रश्न आते हैं। नीचे हर आपात स्थिति को शून्य से समझाया गया है — पहले अवधारणा, फिर बिंदुवार 'करें-न करें', फिर 'याद रखें' व तालिकाएँ। एक बार ध्यान से पढ़कर तालिकाओं से दोहरा लें।

1. प्राथमिक चिकित्सा के सिद्धांत व ABC (आधार समझें)

प्राथमिक चिकित्सा शुरू करने से पहले 'फर्स्ट एडर' को एक तय क्रम का पालन करना होता है ताकि घबराहट में कोई जरूरी कदम न छूटे। सबसे पहले — दृश्य (स्थान) को सुरक्षित करें (बिजली का तार, आग, यातायात हटाएँ), फिर रोगी की स्थिति जाँचें। जाँच का सबसे महत्वपूर्ण क्रम 'ABC' कहलाता है:

संक्षेप में — प्राथमिक चिकित्सा के तीन उद्देश्य हैं: जान बचाना, हालत बिगड़ने से रोकना व आराम देना। जाँच ABC क्रम में करें — पहले वायुमार्ग, फिर श्वसन, फिर रक्त-संचार। याद रखें, फर्स्ट एडर का पहला काम स्वयं व रोगी की सुरक्षा है।

घायल की जाँच व देखभाल — रिकवरी पोजीशन व ABC प्राथमिक चिकित्सा का आधार
घायल की जाँच व देखभाल — रिकवरी पोजीशन व ABC प्राथमिक चिकित्सा का आधार
Michal Maňas · Public domain · Wikimedia Commons
याद रखें
  • प्राथमिक चिकित्सा के 3 उद्देश्य — जान बचाना, हालत बिगड़ने से रोकना, आराम देना (3P)।
  • जाँच का क्रम = ABC → A वायुमार्ग, B श्वसन (Look-Listen-Feel), C रक्त-संचार।
  • बेहोश की जीभ वायुमार्ग बंद कर सकती है — सिर पीछे, ठुड्डी ऊपर (Head-tilt, Chin-lift)।
  • गंभीर चोट का पहला घंटा = 'गोल्डन ऑवर' (Golden Hour) — सबसे निर्णायक।

2. रक्तस्राव (Bleeding) व घाव-पट्टी

रक्तस्राव यानी शरीर से खून बहना — चोट लगने पर सबसे आम व जानलेवा आपात स्थिति। यह तीन प्रकार का होता है: धमनी (Arterial — चमकीला लाल, फव्वारे की तरह उछलता, सबसे खतरनाक), शिरा (Venous — गहरा लाल, बहता हुआ) व केशिका (Capillary — हल्का रिसाव)। भारी रक्तस्राव से शरीर में रक्त की कमी (Shock/सदमा) हो सकती है, इसलिए इसे तुरंत रोकना प्राथमिकता है।

याद रखें — रक्तस्राव रोकने का सर्वप्रथम उपाय 'सीधा दबाव' है, टूर्निकेट नहीं। नकसीर में सिर आगे झुकाएँ। घाव पर हल्दी/राख/मिट्टी लगाना संक्रमण बढ़ा सकता है — केवल साफ पट्टी का प्रयोग करें।

याद रखें
  • रक्तस्राव 3 प्रकार — धमनी (चमकीला, उछलता, सबसे खतरनाक), शिरा, केशिका।
  • रोकने का पहला उपाय = घाव पर 'सीधा दबाव' (Direct Pressure) + अंग ऊँचा रखना।
  • नकसीर में — बैठाकर सिर आगे झुकाएँ, नाक का नरम भाग दबाएँ (सिर पीछे नहीं)।
  • टूर्निकेट केवल अंतिम उपाय; पट्टी इतनी कसी न हो कि रक्त-संचार रुके।

3. जलना (Burns) — श्रेणियाँ व उपचार

जलना (Burn) — आग, गर्म तरल (भाप/पानी), बिजली, रसायन या धूप से त्वचा की क्षति। जली त्वचा से शरीर की सुरक्षा-परत टूट जाती है, द्रव बह जाता है और संक्रमण का खतरा होता है। गहराई के आधार पर जलने की तीन श्रेणियाँ होती हैं:

याद रखें — जलने पर सबसे पहला व सही उपचार 'बहता ठंडा पानी (10-20 मिनट)' है। टूथपेस्ट, घी, तेल, हल्दी, मक्खन, बर्फ या स्याही लगाना गलत व हानिकारक है — इससे गर्मी अंदर बंद हो जाती है व संक्रमण बढ़ता है।

याद रखें
  • जलने की 3 श्रेणियाँ — प्रथम (लालिमा), द्वितीय (फफोले), तृतीय (पूरी त्वचा/ऊतक — सबसे गंभीर)।
  • सबसे सही प्राथमिक उपचार = 10-20 मिनट बहता ठंडा पानी।
  • फफोले न फोड़ें; जली त्वचा से चिपका कपड़ा न खींचें।
  • बिजली से जलने पर पहले मेन स्विच बंद करें, फिर रोगी को छुएँ।

4. अस्थिभंग (Fracture) व मोच

अस्थिभंग (Fracture) यानी हड्डी का टूटना। यदि टूटी हड्डी त्वचा फाड़कर बाहर दिखे तो 'खुला/संयुक्त भंग' (Open/Compound Fracture) और यदि त्वचा के अंदर ही रहे तो 'बंद भंग' (Closed/Simple Fracture) कहलाता है। लक्षण — तीव्र दर्द, सूजन, अंग का टेढ़ा होना, हिलाने में असमर्थता। प्राथमिक चिकित्सा का मूल मंत्र है — टूटे अंग को हिलने न दें।

याद रखें — अस्थिभंग में टूटे अंग को हिलाएँ नहीं, स्थिर करके (Splint) ही अस्पताल ले जाएँ। हड्डी स्वयं बैठाने या मालिश करने की कोशिश कभी न करें। मोच का सही उपचार = RICE।

याद रखें
  • खुला/संयुक्त भंग = हड्डी त्वचा फाड़कर बाहर; बंद/सरल भंग = त्वचा के अंदर।
  • प्राथमिक उपचार = टूटे अंग को स्थिर करना (Splint/खपच्ची), हिलाना नहीं।
  • हड्डी स्वयं बैठाने या मालिश करने की कोशिश न करें।
  • मोच (Sprain) का उपचार = RICE (Rest, Ice, Compression, Elevation)।

5. बेहोशी (Fainting) व मिर्गी का दौरा

बेहोशी/मूर्च्छा (Fainting / Syncope) — मस्तिष्क तक रक्त (व ऑक्सीजन) की क्षणिक कमी से व्यक्ति का अचानक होश खो देना। कारण — गर्मी, भूख, कमजोरी, डर, अधिक देर खड़े रहना, रक्त की कमी। यह प्रायः थोड़ी देर में स्वयं ठीक हो जाती है, पर सही स्थिति देना जरूरी है।

याद रखें — बेहोशी में पैर ऊँचे करके लिटाएँ (सिर नहीं) ताकि मस्तिष्क को रक्त मिले। बेहोश के मुँह में कुछ भी न डालें। मिर्गी के दौरे में मुँह में कोई वस्तु डालना खतरनाक है।

याद रखें
  • बेहोशी = मस्तिष्क को रक्त/ऑक्सीजन की क्षणिक कमी; उपचार — लिटाकर पैर ऊँचे करें।
  • साँस चल रही हो तो करवट लिटाएँ = 'रिकवरी पोजीशन' (उल्टी से बचाव)।
  • बेहोश के मुँह में पानी/दवा/खाना न डालें।
  • मिर्गी के दौरे में मुँह में चम्मच/उँगली न डालें; नुकीली चीजें हटाएँ।

6. दम घुटना (Choking) — हीमलिक विधि

दम घुटना (Choking) — भोजन का टुकड़ा या कोई वस्तु गले/वायुमार्ग में अटककर साँस का रास्ता बंद कर देना। व्यक्ति बोल/खाँस/साँस नहीं ले पाता, गले पर हाथ रखता है (universal choking sign), चेहरा नीला पड़ने लगता है। यह कुछ ही मिनटों में जानलेवा हो सकता है, इसलिए तुरंत कार्रवाई जरूरी है।

याद रखें — दम घुटने पर वयस्क/बड़े बच्चे में 'हीमलिक विधि (पेट पर अंदर-ऊपर झटके)' मुख्य उपाय है। एक साल से छोटे शिशु पर हीमलिक नहीं, पीठ-थपकी व छाती-दबाव देते हैं।

याद रखें
  • दम घुटने का संकेत — बोल/खाँस/साँस न पाना, गले पर हाथ, चेहरा नीला।
  • वयस्क में मुख्य उपाय = हीमलिक विधि (नाभि से ऊपर मुट्ठी, अंदर-ऊपर झटके)।
  • पहले खाँसने दें → फिर पीठ पर 5 थपकी → फिर 5 पेट-झटके।
  • 1 साल से छोटे शिशु पर हीमलिक नहीं — पीठ-थपकी व छाती-दबाव।

7. साँप काटना (Snake Bite) — करें व न करें

साँप काटने पर सबसे बड़ी हानि 'विष' से नहीं बल्कि 'डर व गलत उपचार' से होती है। भारत में अधिकांश साँप विषहीन होते हैं; मुख्य विषैले साँप चार हैं — नाग (Cobra), करैत (Krait), रसेल वाइपर (Russell's Viper) व सॉ-स्केल्ड वाइपर/फुरसा। प्राथमिक चिकित्सा का लक्ष्य — विष को शरीर में तेजी से फैलने से रोकना और रोगी को शीघ्र अस्पताल पहुँचाना, जहाँ 'एंटी-स्नेक-वेनम (ASV)' दिया जाता है।

याद रखें — साँप काटने पर रोगी को शांत रखें व जल्दी अस्पताल पहुँचाएँ। घाव काटना, चूसना, रस्सी कसकर बाँधना व झाड़-फूँक — सब गलत हैं। एकमात्र इलाज ASV (एंटी-स्नेक-वेनम) है।

याद रखें
  • भारत के चार मुख्य विषैले साँप — नाग, करैत, रसेल वाइपर, सॉ-स्केल्ड वाइपर (फुरसा)।
  • रोगी को शांत व स्थिर रखें; काटा अंग कम हिलाएँ (विष धीमा फैले)।
  • घाव काटना/चूसना/जलाना व कसी रस्सी बाँधना — सब गलत व हानिकारक।
  • एकमात्र निश्चित इलाज = एंटी-स्नेक-वेनम (ASV); तुरंत अस्पताल/108।

8. हृदयाघात (Heart Attack), CPR व मुख-से-मुख श्वसन

हृदयाघात (Heart Attack / Myocardial Infarction) — हृदय की पेशी तक रक्त (ऑक्सीजन) पहुँचाने वाली कोरोनरी धमनी में रुकावट से हृदय का एक भाग क्षतिग्रस्त हो जाना। लक्षण — छाती के बीच भारी दर्द/दबाव (बायीं बाँह, जबड़े, पीठ तक फैलता), पसीना, घबराहट, साँस फूलना। यदि हृदय धड़कना बंद कर दे (Cardiac Arrest) तो 'CPR' ही जान बचा सकता है।

याद रखें — CPR = कार्डियो-पल्मोनरी रिससिटेशन; छाती दबाने की गति 100-120/मिनट, गहराई 5-6 सेमी, अनुपात 30:2 (30 दबाव : 2 साँस)। हृदयाघात में सबसे जरूरी — तुरंत 108 बुलाना व आवश्यकता हो तो CPR शुरू करना।

CPR — छाती दबाना (100-120/मिनट, अनुपात 30:2)
CPR — छाती दबाना (100-120/मिनट, अनुपात 30:2)
Sr. M. Sgt. DeAndre Curtiss, U.S. Air Force · Public domain · Wikimedia Commons
याद रखें
  • CPR = Cardio-Pulmonary Resuscitation (हृत्फुफ्फुसीय पुनरुज्जीवन)।
  • छाती दबाने की गति = 100-120 बार/मिनट; गहराई ~5-6 सेमी (सख्त सतह पर)।
  • वयस्क में अनुपात = 30:2 (30 छाती-दबाव : 2 मुख-से-मुख श्वसन)।
  • हृदयाघात लक्षण — छाती में दर्द (बायीं बाँह/जबड़े तक), पसीना; तुरंत 108।

9. आपातकालीन नंबर व करें-न करें (सारांश)

आपात स्थिति में सही नंबर पर तुरंत कॉल करना प्राथमिक चिकित्सा का अनिवार्य हिस्सा है। भारत में अब अधिकांश आपातकालीन सेवाएँ एक एकीकृत नंबर '112' (ERSS — Emergency Response Support System) से भी जुड़ी हैं, पर अलग-अलग सेवाओं के अपने नंबर भी चालू हैं:

याद रखें — एम्बुलेंस = 108, जननी/शिशु = 102, पुलिस = 100, अग्निशमन = 101, एकीकृत = 112। हर आपात स्थिति में 'पहले सुरक्षा, फिर ABC, फिर 108' का क्रम अपनाएँ।

याद रखें
  • एम्बुलेंस = 108; जननी/शिशु (गर्भवती-नवजात) = 102; पुलिस = 100; अग्निशमन = 101।
  • एकीकृत आपातकालीन नंबर = 112; चाइल्ड हेल्पलाइन = 1098; महिला = 1091।
  • करें — सुरक्षा, ABC, रक्तस्राव रोकें, 108 बुलाएँ, रोगी को आश्वस्त करें।
  • न करें — जले पर तेल/घी, बेहोश के मुँह में कुछ, साँप-घाव काटना, हड्डी खींचना।

प्राथमिक चिकित्सा — झलकियाँ

परीक्षा-उपयोगी तालिकाएँ

आपातकालीन नंबर ↔ सेवा

नंबरसेवा
108एम्बुलेंस / चिकित्सा आपातकाल
102जननी-शिशु (गर्भवती व नवजात) सेवा
100पुलिस
101अग्निशमन (Fire)
112एकीकृत आपातकालीन नंबर (ERSS)
1098 / 1091चाइल्ड हेल्पलाइन / महिला हेल्पलाइन

आपात स्थिति ↔ मुख्य प्राथमिक उपचार

स्थितिसही प्राथमिक उपचार
रक्तस्रावघाव पर सीधा दबाव + अंग ऊँचा रखें
जलना10-20 मिनट बहता ठंडा पानी
अस्थिभंगअंग स्थिर करें (खपच्ची/Splint)
बेहोशीलिटाकर पैर ऊँचे करें; करवट लिटाएँ
दम घुटनाहीमलिक विधि (पेट पर अंदर-ऊपर झटके)
साँप काटनाशांत रखें, स्थिर करें, अस्पताल (ASV)
हृदयाघात / धड़कन रुकना108 बुलाएँ; आवश्यकता हो तो CPR (30:2)

CPR — मुख्य आँकड़े (वयस्क)

बिंदुमान
पूरा नामCardio-Pulmonary Resuscitation
छाती दबाने की गति100-120 बार/मिनट
दबाव की गहराईलगभग 5-6 सेंटीमीटर
दबाव : श्वसन अनुपात30 : 2
दबाने का स्थानछाती के बीच (उरोस्थि)
सतहसख्त व समतल

करें (Do's) ↔ न करें (Don'ts)

करें ✔न करें ✘
जले पर ठंडा पानी डालेंजले पर तेल/घी/टूथपेस्ट/बर्फ न लगाएँ
नकसीर में सिर आगे झुकाएँनकसीर में सिर पीछे न झुकाएँ
बेहोश को करवट लिटाएँबेहोश के मुँह में कुछ न डालें
साँप-काटे को शांत रख अस्पताल लाएँघाव न काटें/न चूसें/रस्सी न बाँधें
टूटे अंग को स्थिर करेंटूटी हड्डी न खींचें/न बैठाएँ
तुरंत 108 बुलाएँझाड़-फूँक में समय न गँवाएँ

रक्तस्राव के प्रकार ↔ पहचान

प्रकारपहचान
धमनी (Arterial)चमकीला लाल, फव्वारे जैसा उछलता — सबसे खतरनाक
शिरा (Venous)गहरा लाल, समान रूप से बहता
केशिका (Capillary)हल्का रिसाव (छोटी खरोंच)

भारत के चार मुख्य विषैले साँप

साँपअंग्रेज़ी नाम
नागCobra
करैतKrait
रसेल वाइपरRussell's Viper
सॉ-स्केल्ड वाइपर (फुरसा)Saw-scaled Viper

शब्दावली — अंग्रेज़ी पद का अर्थ

प्राथमिक चिकित्सा (First Aid)
डॉक्टर के पास पहुँचने से पहले घायल/बीमार को दी जाने वाली तुरंत व अस्थायी सहायता।
ABC
जाँच का क्रम — Airway (वायुमार्ग), Breathing (श्वसन), Circulation (रक्त-संचार)।
CPR
कार्डियो-पल्मोनरी रिससिटेशन — साँस/धड़कन रुकने पर छाती दबाकर व श्वसन देकर जान बचाना।
मुख-से-मुख श्वसन
कृत्रिम श्वसन — रोगी के मुँह में फूँक देकर फेफड़ों में हवा भरना (Rescue Breathing)।
हीमलिक विधि
दम घुटने पर पेट पर अंदर-ऊपर झटके देकर अटकी वस्तु निकालना (Abdominal Thrust)।
रिकवरी पोजीशन
साँस लेते बेहोश व्यक्ति को करवट (एक ओर) लिटाना ताकि उल्टी/लार वायुमार्ग में न जाए।
टूर्निकेट (Tourniquet)
अत्यधिक रक्तस्राव में घाव के ऊपर कसी पट्टी — केवल अंतिम उपाय।
ड्रेसिंग व पट्टी
घाव पर रखी रोगाणुरहित परत (Dressing) व उसे बाँधने वाली पट्टी (Bandage)।
अस्थिभंग (Fracture)
हड्डी का टूटना — खुला (हड्डी बाहर) या बंद (त्वचा के अंदर)।
खपच्ची (Splint)
टूटे अंग को स्थिर रखने हेतु बाँधी जाने वाली लकड़ी/कड़ी पट्टी।
ASV (एंटी-स्नेक-वेनम)
साँप के विष का एकमात्र निश्चित इलाज — अस्पताल में दिया जाने वाला प्रति-विष इंजेक्शन।
गोल्डन ऑवर
गंभीर चोट/हृदयाघात के बाद का पहला घंटा — जान बचाने में सबसे निर्णायक समय।
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