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राजस्थान की प्राचीन सभ्यताएँ

कालीबंगा · आहड़ · गणेश्वर · बालाथल · बागोर · गिलूंड · बैराठ — खोज, उत्खननकर्ता, विशेषता व काल — संपूर्ण अध्याय
कालीबंगा (हनुमानगढ़) — हड़प्पा-कालीन नगर की मुख्य सड़क का उत्खनन
कालीबंगा (हनुमानगढ़) — हड़प्पा-कालीन नगर की मुख्य सड़क का उत्खनन
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण · GODL-India · Wikimedia Commons

शुरू करने से पहले

राजस्थान की प्राचीन सभ्यताएँ हमें बताती हैं कि हज़ारों वर्ष पहले इस धरती पर मनुष्य कैसे रहता था — कहाँ खेती हुई, कहाँ ताँबा गलाया गया और कहाँ नगर बसे। इतिहास में 'सभ्यता-स्थल' (पुरातात्विक/Archaeological site) वह जगह है जहाँ उत्खनन (खुदाई) में प्राचीन बस्तियों के अवशेष मिले हैं। राजस्थान की भूमि सिंधु-सरस्वती (हड़प्पा) काल से लेकर ताम्र-पाषाण (चालकोलिथिक) व मध्यपाषाण (मेसोलिथिक) तक के स्थलों से भरी है। CET में इस अध्याय से लगभग हर बार प्रश्न आता है — खासकर 'स्थल ↔ जिला ↔ नदी ↔ उत्खननकर्ता ↔ खोज वर्ष ↔ विशेषता' के मिलान-प्रश्न, तथा 'सबसे पहला/सबसे प्राचीन/जुता हुआ खेत/अग्निकुंड' जैसे विशेष तथ्य। इस पेज में हम शून्य से शुरू करेंगे — पहले बुनियादी शब्द (पाषाण काल, ताम्र-पाषाण, हड़प्पा) समझेंगे, फिर सातों प्रमुख स्थलों (कालीबंगा, आहड़, गणेश्वर, बालाथल, बागोर, गिलूंड, बैराठ) को एक-एक करके पढ़ेंगे और अंत में तालिकाओं, मानचित्र से दोहराएँगे। हर तथ्य परीक्षा-केंद्रित है, इसलिए नाम-वर्ष-जिले ध्यान से याद करें।

1. बुनियाद — पाषाण काल, ताम्र-पाषाण व सभ्यता-स्थल का अर्थ

किसी भी सभ्यता-स्थल को समझने से पहले 'काल' (Age) का अर्थ समझना ज़रूरी है। मानव इतिहास को औज़ार (हथियार) की सामग्री के आधार पर विभाजित किया जाता है:

ध्यान दें — राजस्थान की अधिकांश सभ्यताएँ नदी के किनारे बसीं: कालीबंगा घग्गर (प्राचीन सरस्वती) पर, आहड़ बेड़च/आयड़ नदी पर, बागोर कोठारी नदी पर। इसलिए स्थल-नदी का मिलान भी ध्यान रखें।

याद रखें
  • पाषाण काल के तीन भाग — पुरा·मध्य·नवपाषाण; बागोर = मध्यपाषाण।
  • ताम्र-पाषाण = पत्थर + ताँबा (लोहा नहीं); आहड़·गिलूंड·बालाथल इसी के।
  • सिंधु-सरस्वती (हड़प्पा) = पहली नगरीय सभ्यता; राजस्थान में कालीबंगा।
  • अधिकांश स्थल नदी-किनारे — कालीबंगा↔घग्गर, आहड़↔बेड़च, बागोर↔कोठारी।

2. कालीबंगा — सिंधु-सरस्वती सभ्यता (हनुमानगढ़)

कालीबंगा राजस्थान का सबसे प्रसिद्ध सभ्यता-स्थल है। यह हनुमानगढ़ जिले में घग्गर नदी (प्राचीन सरस्वती) के किनारे स्थित है। 'कालीबंगा' का अर्थ है 'काली चूड़ियाँ' — खुदाई में यहाँ काली चूड़ियों के अवशेष मिले थे, इसी से नाम पड़ा।

कालीबंगा को 'राजस्थान की मोहनजोदड़ो' भी कहा जाता है। यहाँ की सड़कें व जल-निकासी मोहनजोदड़ो जितनी विकसित नहीं थीं, फिर भी नगर-नियोजन के स्पष्ट प्रमाण मिले। इसे सिंधु सभ्यता की 'तृतीय राजधानी' की संज्ञा भी दी गई है।

कालीबंगा पुरास्थल (हनुमानगढ़) — विश्व का सबसे प्राचीन 'जुता हुआ खेत' यहीं मिला
कालीबंगा पुरास्थल (हनुमानगढ़) — विश्व का सबसे प्राचीन 'जुता हुआ खेत' यहीं मिला
Kk himalaya · Public domain · Wikimedia Commons
याद रखें
  • कालीबंगा = हनुमानगढ़ जिला, घग्गर (सरस्वती) नदी; अर्थ 'काली चूड़ियाँ'।
  • खोज — अमलानंद घोष (1952); उत्खनन — बी.बी. लाल व बी.के. थापर (1961-69)।
  • विश्व का सबसे प्राचीन 'जुता हुआ खेत' व प्राचीनतम भूकंप-प्रमाण यहीं मिला।
  • सिंधु-सरस्वती (हड़प्पा) सभ्यता; 'राजस्थान की मोहनजोदड़ो'।

3. आहड़ — ताम्रवती नगरी (उदयपुर)

आहड़ दक्षिणी राजस्थान का प्रमुख ताम्र-पाषाणकालीन स्थल है। यह उदयपुर जिले में आहड़ (बेड़च/आयड़) नदी के किनारे स्थित है। यहाँ ताँबे के अत्यधिक उपयोग के कारण इसे प्राचीन काल में 'ताम्रवती नगरी' कहा जाता था; मध्यकाल में इसे 'आघाटपुर/आघाट दुर्ग' तथा 'धूलकोट' भी कहा गया।

आहड़ संस्कृति को 'बनास संस्कृति' (Banas Culture) भी कहा जाता है क्योंकि यह बनास नदी-घाटी की संस्कृति का प्रतिनिधित्व करती है। यहाँ के निवासी पत्थर व मिट्टी के मकानों में रहते थे और ताँबे के व्यापार से समृद्ध थे।

याद रखें
  • आहड़ = उदयपुर जिला, आहड़/बेड़च (आयड़) नदी; उपनाम 'ताम्रवती नगरी', 'धूलकोट'।
  • उत्खनन — आर.सी. अग्रवाल (1956), एच.डी. सांकलिया (1961-62)।
  • ताम्र-पाषाण काल; ताँबा गलाने का बड़ा केंद्र (छह मुहरें, भट्टियाँ)।
  • काले-लाल मृद्भांड; आहड़ संस्कृति = 'बनास संस्कृति'।

4. गणेश्वर — ताम्रनगरी / ताम्रयुगीन सभ्यताओं की जननी (सीकर)

गणेश्वर सीकर जिले में कांतली नदी के किनारे स्थित है। यह राजस्थान का सर्वाधिक प्राचीन ताम्र-उत्पादक स्थल है। यहाँ इतनी अधिक ताँबे की वस्तुएँ मिलीं कि इसे 'ताम्रनगरी' तथा 'ताम्रयुगीन सभ्यताओं की जननी (माँ)' कहा जाता है।

गणेश्वर-जोधपुरा संस्कृति इस क्षेत्र की ताम्रयुगीन संस्कृति को कहते हैं। गणेश्वर की निकटता खेतड़ी (विश्वप्रसिद्ध ताँबे की खान) से होने के कारण यह ताँबे का बड़ा केंद्र बना।

याद रखें
  • गणेश्वर = सीकर जिला, कांतली नदी; उपनाम 'ताम्रनगरी', 'ताम्र सभ्यताओं की जननी'।
  • उत्खनन — आर.सी. अग्रवाल व विजय कुमार (1977)।
  • 1000+ ताँबे की वस्तुएँ; हड़प्पा को भी ताँबा आपूर्ति की।
  • ताँबा खेतड़ी (झुंझुनूँ) की खानों से; राजस्थान का प्राचीनतम ताम्र-केंद्र।

5. बालाथल व गिलूंड — आहड़/बनास संस्कृति के अन्य स्थल (उदयपुर·राजसमंद)

बालाथल और गिलूंड दोनों ताम्र-पाषाणकालीन (आहड़/बनास संस्कृति) स्थल हैं और दोनों का संबंध मेवाड़ क्षेत्र से है।

बालाथल व गिलूंड दोनों बनास/आहड़ संस्कृति के विस्तार को दर्शाते हैं — अर्थात् मेवाड़ क्षेत्र में ताम्र-पाषाण काल में सघन बस्तियाँ थीं। बालाथल का 'कुष्ठ रोग का कंकाल' तथा गिलूंड की 'मुहरें' परीक्षा-दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।

याद रखें
  • बालाथल = उदयपुर (वल्लभनगर); उत्खनन वी.एन. मिश्र; विश्व का प्राचीनतम कुष्ठ-कंकाल।
  • बालाथल = पत्थर का विशाल दुर्ग/परकोटा वाला किलानुमा स्थल।
  • गिलूंड = राजसमंद, बनास नदी; उत्खनन बी.बी. लाल (1957-58)।
  • गिलूंड में मुहरें/मुद्रा-निधि; दोनों आहड़/बनास संस्कृति के।

6. बागोर — मध्यपाषाण काल का बड़ा स्थल (भीलवाड़ा)

बागोर भीलवाड़ा जिले की माण्डल तहसील में कोठारी नदी (बनास की सहायक) के किनारे स्थित है। यह राजस्थान का सबसे बड़ा व सबसे महत्वपूर्ण मध्यपाषाण (Mesolithic) कालीन स्थल है। इसे 'महासतियों का टीला' भी कहा जाता है।

ध्यान दें — बागोर सभ्यता ताम्र-पाषाण की नहीं, मध्यपाषाण काल की है। यह आदिम शिकारी-संग्राहक से पशुपालक बनते मानव का स्थल है, जहाँ कृषि व पशुपालन के प्रारंभिक प्रमाण मिले।

याद रखें
  • बागोर = भीलवाड़ा जिला, कोठारी नदी; 'महासतियों का टीला'।
  • मध्यपाषाण (Mesolithic) काल — राजस्थान का सबसे बड़ा मध्यपाषाणिक स्थल।
  • उत्खनन — वी.एन. मिश्र (1967-70)।
  • सूक्ष्म पाषाण उपकरण (Microliths) व भेड़-बकरी पालन के प्राचीन प्रमाण।

7. बैराठ — मौर्य-बौद्ध युग का स्थल (विराटनगर, जयपुर/कोटपूतली-बहरोड़)

बैराठ (प्राचीन 'विराटनगर') जयपुर के निकट (वर्तमान कोटपूतली-बहरोड़ जिला) स्थित ऐतिहासिक स्थल है। यह महाभारत-कालीन मत्स्य महाजनपद की राजधानी मानी जाती है — पांडवों ने अज्ञातवास यहीं (विराट राज्य में) बिताया था। बाद में यह मौर्य व बौद्ध काल का प्रमुख केंद्र बना।

बैराठ की 'बीजक की पहाड़ी' से मौर्यकालीन गोल बौद्ध मंदिर के अवशेष मिले। यहाँ की अशोक-लिपि (ब्राह्मी) के शिलालेख इसे राजस्थान का सबसे महत्वपूर्ण बौद्ध-मौर्य स्थल बनाते हैं।

याद रखें
  • बैराठ = विराटनगर (जयपुर/कोटपूतली-बहरोड़); मत्स्य जनपद की राजधानी।
  • उत्खनन — दयाराम साहनी (1936-37), बनर्जी व दीक्षित (1962-63)।
  • राजस्थान का एकमात्र स्थल जहाँ अशोक के शिलालेख (भाब्रू/बैराठ) मिले।
  • भारत का प्राचीनतम गोलाकार बौद्ध मंदिर; पांडवों का अज्ञातवास-स्थल।

8. संपूर्ण दोहराव — स्थल, जिला, नदी, काल व विशेषता एक नज़र में

अब सभी सात स्थलों को एक साथ जोड़कर याद करें। CET के मिलान-प्रश्नों में सबसे ज़्यादा गड़बड़ 'जिला' व 'विशेषता' में होती है, इसलिए इन्हें क्रम से दोहराएँ:

इस तरह राजस्थान की सभ्यताएँ मध्यपाषाण (बागोर) → ताम्रयुगीन (गणेश्वर) → ताम्र-पाषाण (आहड़/गिलूंड/बालाथल) → हड़प्पाई (कालीबंगा) → मौर्य-बौद्ध (बैराठ) तक का संपूर्ण क्रम दिखाती हैं। अगले भाग की तालिकाओं व मानचित्र से इन्हें दोहराएँ।

याद रखें
  • कालीबंगा↔हनुमानगढ़, आहड़·बालाथल↔उदयपुर, गणेश्वर↔सीकर।
  • बागोर↔भीलवाड़ा, गिलूंड↔राजसमंद, बैराठ↔जयपुर क्षेत्र।
  • सर्वाधिक प्राचीन ताम्र-केंद्र = गणेश्वर; एकमात्र मध्यपाषाण = बागोर।
  • अशोक शिलालेख = बैराठ; जुता खेत = कालीबंगा; कुष्ठ-कंकाल = बालाथल।

राजस्थान की प्राचीन सभ्यताएँ — स्थल जिलेवार

सिंधु-सरस्वती (हड़प्पा)ताम्र-पाषाण (आहड़/बनास)ताम्रयुगीन (गणेश्वर)मध्यपाषाण (बागोर)मौर्य-बौद्ध (बैराठ)
कालीबंगाआहड़बालाथलगिलूंडगणेश्वरबागोरबैराठ
किसी रंगीन बिंदु पर टैप करें — विवरण यहाँ दिखेगा।

राजस्थान की प्राचीन सभ्यताएँ — झलकियाँ

परीक्षा-उपयोगी तालिकाएँ

सभ्यता-स्थल → जिला व नदी

स्थलजिला · नदी
कालीबंगाहनुमानगढ़ · घग्गर (सरस्वती)
आहड़ (ताम्रवती)उदयपुर · आहड़/बेड़च (आयड़)
गणेश्वर (ताम्रनगरी)सीकर · कांतली
बालाथलउदयपुर (वल्लभनगर) · बेड़च
बागोर (मध्यपाषाण)भीलवाड़ा · कोठारी
गिलूंडराजसमंद · बनास
बैराठ (विराटनगर)जयपुर/कोटपूतली-बहरोड़ · बाणगंगा क्षेत्र

स्थल → उत्खननकर्ता व खोज वर्ष

स्थलउत्खननकर्ता (वर्ष)
कालीबंगाखोज: अमलानंद घोष (1952); उत्खनन: बी.बी. लाल व बी.के. थापर (1961-69)
आहड़आर.सी. अग्रवाल (1956); एच.डी. सांकलिया (1961-62)
गणेश्वरआर.सी. अग्रवाल व विजय कुमार (1977)
बालाथलवी.एन. मिश्र / वी.एस. शिंदे (1993-94)
बागोरवी.एन. मिश्र (1967-70)
गिलूंडबी.बी. लाल (1957-58); वी.एस. शिंदे व ग्रेगरी पोसेल
बैराठदयाराम साहनी (1936-37); बनर्जी व दीक्षित (1962-63)

स्थल → काल व संस्कृति

स्थलकाल / संस्कृति
बागोरमध्यपाषाण (~5000-2000 ई.पू.)
गणेश्वरताम्रयुगीन (~2800-2200 ई.पू.)
आहड़ · गिलूंड · बालाथलताम्र-पाषाण / आहड़-बनास संस्कृति (~3000-1500 ई.पू.)
कालीबंगासिंधु-सरस्वती / हड़प्पा (~3000-1750 ई.पू.)
बैराठमौर्य-बौद्ध काल (~तीसरी शताब्दी ई.पू.)

स्थल → सबसे प्रसिद्ध विशेषता (एक पंक्ति)

विशेषतास्थल
विश्व का प्राचीनतम जुता हुआ खेत व भूकंप-प्रमाणकालीबंगा
ताँबा गलाने का केंद्र; 'ताम्रवती नगरी'आहड़
'ताम्र सभ्यताओं की जननी'; 1000+ ताँबे की वस्तुएँगणेश्वर
विश्व का प्राचीनतम कुष्ठ-रोग कंकाल; विशाल दुर्गबालाथल
सूक्ष्म पाषाण उपकरण; पशुपालन के प्राचीन प्रमाणबागोर
मुहरें / मुद्रा-निधिगिलूंड
अशोक के शिलालेख; गोल बौद्ध मंदिरबैराठ

उपनाम / पर्यायवाची → स्थल

उपनामस्थल
ताम्रवती नगरी / आघाटपुर / धूलकोटआहड़
ताम्रनगरी / ताम्र सभ्यताओं की जननीगणेश्वर
विराटनगर / मत्स्य जनपद की राजधानीबैराठ
राजस्थान की मोहनजोदड़ोकालीबंगा
महासतियों का टीलाबागोर

शब्दावली — अंग्रेज़ी पद का अर्थ

सभ्यता-स्थल (Archaeological Site)
वह स्थान जहाँ उत्खनन में प्राचीन बस्ती के अवशेष मिले हों।
उत्खनन (Excavation)
वैज्ञानिक खुदाई जिससे ज़मीन में दबे पुरातात्विक अवशेष निकाले जाते हैं।
ताम्र-पाषाण काल (Chalcolithic)
पत्थर के साथ ताँबे के उपयोग का युग; लोहा अभी नहीं आया था।
मध्यपाषाण काल (Mesolithic)
पाषाण काल का मध्य चरण; सूक्ष्म पाषाण उपकरण व पशुपालन का आरंभ (बागोर)।
सिंधु-सरस्वती / हड़प्पा सभ्यता
भारत की पहली नगरीय सभ्यता; राजस्थान में कालीबंगा इसका स्थल।
जुता हुआ खेत
हल से जुती कृषि-भूमि; विश्व का प्राचीनतम प्रमाण कालीबंगा में मिला।
ताँबा गलाना (Copper Smelting)
अयस्क को गलाकर ताँबा बनाना; आहड़ व गणेश्वर इसके केंद्र थे।
सूक्ष्म पाषाण उपकरण (Microliths)
छोटे-छोटे पत्थर के औज़ार; मध्यपाषाण काल की पहचान (बागोर)।
मृद्भांड (Pottery)
मिट्टी के बर्तन; आहड़ की 'काले-लाल मृद्भांड' संस्कृति प्रसिद्ध।
बनास/आहड़ संस्कृति
बनास नदी-घाटी की ताम्र-पाषाणकालीन संस्कृति (आहड़, गिलूंड, बालाथल)।
शिलालेख (Inscription)
पत्थर/स्तंभ पर उत्कीर्ण लेख; अशोक के शिलालेख बैराठ में मिले।
मत्स्य जनपद
महाभारत-कालीन महाजनपद जिसकी राजधानी विराटनगर (बैराठ) थी।
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